Thursday, 8 September 2016

अन्ना का चीरहरण करने वाले आप के महारथी

लंबे समय के बाद अन्ना हजारे की टीम केजरीवाल पर टिप्पणी दिखी, उन्होंने कहा मैंने अरविन्द से कहा था अच्छे चरित्रवान लोगों का चयन करना, लेकिन देखा जाय तो केजरीवाल की टीम का बड़ा हिस्सा अन्ना आन्दोलन में शामिल था. क्या अन्ना ने खुद कुछ खुदगर्ज चेहरों का चयन किया था? जिन्होंने अन्ना आन्दोलन को सत्ता प्राप्ति के लिए भुनाया है. आज जिस समय अन्ना केजरीवाल की नीयत पर सवाल उठा रहें हैं, वह समय केजरीवाल के लिए काफी कठिन है. पंजाब में चुनाव से ठीक पहले संदीप कुमार प्रकरण सामने आने से विपक्षियों को एक बड़ा विषय मिल गया है. केजरीवाल ही नहीं किरण बेदी भी अन्ना आन्दोलन का हिस्सा थी लेकिन वे भी भाजपा की गोद में जा बैठी. ये निश्चित है कि टीम अन्ना में ही चरित्रवानों की कमी रही होगी, तो अब जब सत्ता मिल गयी है, तो सत्ता का मजा और मद चरित्र को कहाँ टिकने देगा. असल में खुद अन्ना एक बड़ी कूटनीति के तहत तत्कालीन सरकार के खिलाफ एक औजार के रूप में प्रयोग किये गये, ये बात इतर है कि उन्हें इसका आभास रहा या नहीं? लेकिन इस्तेमाल करने वालों को ये पता नहीं था कि एक केजरीवाल वहां पैदा हो रहा है, जो आने वाले समय में उनके गले कि हड्डी बन सकता है. चूंकि केजरीवाल एक आन्दोलन और आभासी असंतोष की परिणिति थे, इसलिए एक बार सत्ता आसानी से प्राप्त कर गये. अन्ना के आन्दोलन ने मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ जो माहौल तैयार किया उसे मोदी ने खूब भुनाया और पहली बार सांसद बन प्रधानमंत्री बन बैठे. अन्ना का आन्दोलन आजाद भारत में जेपी आन्दोलन के बाद शायद उससे भी बड़ा आन्दोलन था, लेकिन आन्दोलन की कमान धीरे-धीरे मौक़ा परस्तों के हाथ में चली गयी. आज समय यह है कि अन्ना को कोई सुनने को तैयार नहीं है. दिल्ली और दिल्ली की सत्ता में चीर हरण सिर्फ अन्ना का हुआ.


No comments:

Post a Comment