Wednesday, 27 November 2019

महाराष्ट्र डर्टी पिक्चर



                               विश्लेषण
महाराष्ट्र में पिछले तीन दिनों में जो कुछ हुआ उससे भारतीय राजनीति के एक नए अध्याय का प्रारम्भ हुआ. बनती बिगड़ती सत्ता और उनके उलझते समीकरण इन सबने ये सोचने को मजबूर कर दिया कि क्या बास्तव में सत्ता वेश्या की तरह प्रयोग में लाई जाती है.

ऐसा नहीं कि सत्ता का चीरहरण इससे पहले ना हुआ हो लेकिन इस बार जो हुआ उसमें ड्रामा, रोमाँच, फैंटेसी सब मौजूद थी. लोकतंत्र में चुनाव और उसके बाद जीतने वाले जनप्रतिनिधियों का बेलगाम कुछ भी करना क्या लोकतंत्र की खूबी नहीं है. इस घटनाक्रम में कौन बड़ा या कौन छोटाएँ प्रश्न बचा ही नहीं सत्ता के खेल में हर कोई पाँसा फेकता नजर आया. 
साभार: Google Search 
संविधान, न्याय, शुचिता, विशेषधिकार सबकी सबने खूब धज्जियाँ उड़ाई. जिस तरीके से पल पल घटनाक्रम बदले उसने इतना साबित कर दिया कि एक नागरिक का वोट बटन दबाने तक महत्वपूर्ण होता है उसके बाद ये वोट बिकता है, नीलाम होता है. उच्च पदों और उच्व पदों पर आसीन लोग किस तरह लोकतंत्र का जनाजा निकाल सकते है इसका अंदाजा 90 घण्टे की सरकार अपने ही उपमुख्यमंत्री के ऊपर लगे तमाम केस वापस कर लेती है जबकि सरकार ने अपना बहुमत भी सिद्ध नहीं किया है से लगाया जा सकता है.


फड़नवीस, शरद पवार, अजित पवार, उद्धव ठाकरे इस सब के सूत्रधार रहे. चाणक्य शब्द खूब बदनाम हुआ. देश में संविधान और कायदों की खुली इज्जत उतारने वालो को चाणक्य कहा गया. एक चाणक्य जिसने अंधेरी रात में सत्ता खड़ी कर दी और दूसरे ने दिन के उजाले में उसी सत्ता को नँगा कर दिया. 

पता नहीं इन् लोगों को चाणक्य कहना चाणक्य के साथ कितना न्याय है इसे बताने के लिए खुद चाणक्य को भी इनके जितना गिरना होगा. लेकिंन अब ये परिपाटी बन जाएगी जो जितना बड़ा जुआरी उतना बड़ा चाणक्य. 
पर ये भी सच है, कि काठ हांडी बार-बार चूल्हे पर चढ़ नहीं सकती है.

(आशुतोष पाण्डेय)

Friday, 22 November 2019

अब विशाल डडलानी छोड़ेंगे इंडियन आइडल

बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़
विशाल डडलानी बॉलीवुड कंपोजर और सिंगर अपनी बेबाक राजनैतिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं. अक्सर अपने ट्वीट्स को लेकर ट्रोलर्स के निशाने पर भी आ जाते हैं. हालिया मामले में पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट को लेकर किये गए उनके ट्वीट के लिए उनकी काफी आलोचना की जा रही है और वे फिर से ट्रोलर्स के निशाने पर हैं. #SackDadlaniFromIndianIdol हैशटैग ट्विटर पर काफी शेयर किया जा रहा है.
आजकल किसी का भी ट्रोल हो जाना आम बात है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई हाल ही में रिटायर हुए हैं. राम मंदिर मामले पर दिया गया उनका फैसला ऐतिहासिक रहा. ट्वीटर पर विशाल को इंडियन आइडल से हटाने की मुहिम चलाई जा रही है. 
लेकिन सोनी एंटरटेनमेंट की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है ना ही विशाल ने इंडियन आइडल को छोड़ने को लेकर कोई अपडेट किया है. अनु मलिक पहले ही #MeToo के कारण इंडियन आइडल छोड़ चुके हैं. उन पर आरोप लगाने वाली सोना महापात्रा ने दो दिन पहले विशाल को कोसा था कि इस मुद्दे पर उन्होंने अनुमलिक की आलोचना क्यों नहीं की?

अनुमलिक की इंडियनआइडल से छुट्टी 









इस बारे में हम आपके विचार आमंत्रित करते हैं कि क्या किसी व्यक्ति विशेष के लिए कोई व्यंगात्मक ट्वीट अपराध है देश में कई बड़े नेता समय समय पर आपत्तिजनक ट्वीट करते आयें हैं, लेकिन उनकी आईटी टीम ट्रोलर को ब्लाक कर देती है लेकिन एक सेलिब्रेटी के पास ऐसी टीम नहीं होती है, यहाँ आप बताएं क्या इस प्रकार के ट्वीट और ट्रोल ठीक हैं?

Thursday, 21 November 2019

शिवसेना की किसान कर्जमाफी घोषणा: मजबूरी या इच्छा



जैसे ही शिवसेना के नेतृत्व में महाराष्ट्र में सरकार बनना तय हुआ वैसे ही घोषणाएं भी शुरू हो गयी हैं. महाराष्ट्र में महाविकास गठबंधन की सरकार बनेगी जिसमें उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री होंगे. एनसीपी और कांग्रेस के सहयोग से बेमेल गठबंधन की सरकार को बनते एक महीने का समय लग गया. शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के साथ कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत सरकार चलाएंगे. हमारे सूत्रों के मुताबिक़ महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों की कर्जमाफी की घोषणा हो सकती है. 
कांग्रेस और एनसीपी के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का यह पहला मुद्दा भी है. शिवसेना सूत्रों के मुताबिक अभी तक के आकलन के अनुसार तकरीबन 35 हजार करोड़ रुपये के किसानों के कर्जमाफ किए जाएंगे. अगर इससे भी ज्यादा रकम किसानों की कर्जा माफी के लिए खर्च करनी पड़े तो सरकार उसके लिए पूरी तरह से तैयार है. सरकार का सबसे ज्यादा फोकस गाँव, गरीबी और किसान पर रहेगा.
सूत्रों के मुताबिक न्यूनतम साझा कार्यक्रम लगभग तैयार है. तीनों ही दल एक दूसरे के वैचारिक धरातल का सम्मान करते हुए आगे बढ़ेंगे. न तो कट्टर हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाएगा और न ही मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए बाकायदा 12 सदस्यीय को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाएगा. इस को-ऑर्डिनेशन कमेटी के ऊपर सुपर कमेटी होगी. इस कमेटी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी के प्रमुख शरद पवार होंगे.

अनु मलिक इंडियन आइडल से बाहर #METOO



सिंगर और कंपोजर अनु मलिक पर कई महिलाओं ने #MeToo मूवमेंट के तहत यौन शोषण के आरोप लगाए थे. जिसके बाद अब अनु मलिक सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल 11वें एडिशन से बाहर हो गए हैं. अनु मलिक ने बीते दिनों सोशल मीड‍िया पर बुरी तरह ट्रोल होने के बाद एक ओपन लेटर भी लिखा था. लेकिन इसके बाद भी विवाद नहीं थमने के कारण अनु मलिक ने शो से बाहर जाने का फैसला किया है. उनके जगह किसे जज बनाया जाएगा इसका अभी कोई पता नहीं है. अनु मलिक पर लगे आरोपों के बाद सोनी टीवी को राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस भेजा था. आयोग ने नोटिस को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी साझा किया था.
अनु मलिक ने कुछ दिनों पहले अपने ऊपर लगे मीटू आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी. उन्होंने #MeToo आरोपों को खारिज करते हुए एक ओपन लेटर ट्व‍िटर हैंडल पर शेयर किया. अनु मलिक ने इस ट्वीट के जरिये लिखा, 'पिछले एक साल से मुझपर कुछ ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं जो मैंने किया ही नहीं है. मैं इतने दिन चुप रहा, इंतजार कर रहा था कि सच अपने आप सामने आ जाएगा. लेकिन अब मुझे एहसास हुआ कि मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी समझा जा रहा है. जबसे मुझपर यह गलत आरोप लगाए गए हैं तब से मेरी प्रतिष्ठा, मेरे और मेरे परिवार के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा है. इन आरोपों ने मुझे और मेरे करियर को बर्बाद कर दिया है. मैं खुद को हेल्पलेस, नजरअंदाज और घुटा हुआ महसूस कर रहा हूं.'

उन्होंने कहा, 'यह बहुत शर्मनाक है कि जिंदगी के इस पड़ाव में मेरे नाम के साथ इतने गंदे शब्द और डरावनी घटनाओं को जोड़ा जा रहा है. इस बारे में पहले क्यों नहीं सवाल किए गए? ये आरोप तभी क्यों लगाए गए जब मैं टीवी पर वापस आया जो कि इस वक्त मेरे आय का एकमात्र जरिया है. दो बेटियों का बाप होने के नाते मैं इस तरह के काम करने की सोच भी नहीं सकता. शो जारी रहना चाहिए. लेकिन इस हंसते चेहरे के पीछे...मैं तकलीफ में हूं. मैं किसी अंधेरे में हूं. मुझे बस न्याय चाहिए.'
इंडियन आइडल 11 के जज पैनल में शामिल होने के बाद अनु मलिक पर यौन शोषण के आरोप लगने लगे. इसके बाद सिंगर सोना मोहापात्रा और नेहा भसीन ने इंडियन आयडल में अनु के जज बनने पर आपत्त‍ि भी जताई थी. हालांकि, इन सबके बीच कई लोग अनु के सपोर्ट में भी आए. इनमें सिंगर हेमा सरदेसाई ओर कश्मीरा शाह भी हैं, जिन्होंने अनु पर लगे आरोपों को झूठा बताया. फिलहाल, अनु इंडियन आइडल सीजन 11 में बतौर जज नजर आ रहे थे. अब देखना है आगे क्या होता है, वैसे बालीवुड में #MeToo के आरोप लगते ही रहते हैं. इन आरोपों की सच्चाई को साबित करने के लिए सबूत भले ही ना हों लेकिन सेलिब्रेटी की जिन्दगी में भूचाल जरूर आ जाता है. 

जेएनयू बीएचयू के बहाने राष्ट्रवाद



इस समय देश के अन्दर अघोषित वैचारिक विद्रोह चल रहा है इस विद्रोह के क्या मायने हैं या इसकी उपादेयता क्या होगी, कोई नहीं जानता है. धर्म जाति के आधार पर तो देश में कई बार विरोध दिखें हैं लेकिन वो कभी देश के संवैधानिक ढांचें पर हावी नहीं हुए. वैसे बाहरी तौर पर देखा जाय तो आजादी के बाद से राष्ट्रवाद का सबसे ज्यादा हल्ला इन 5 सालों में हुआ है इससे देश का कितना फायदा हुआ कहा नहीं जा सकता है. लेकिन राष्ट्रवाद की आड़ में घृणा जरूर व्यापक रूप में पनपी है.
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एक मुस्लिम के संस्कृत पढाने को लेकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन क्या है? विश्वगुरू की कल्पना में जीने वाला देश आज धार्मिक कट्टरता के साथ जी रहा है. प्रो० फिरोज खान संस्कृत के श्लोक नहीं पढ़ा सकते हैं क्या ये ही हिन्दू धर्म का सत्व है. अगर आप कह दो ये गलत तो आप से कहा जाता है दूसरे धर्म की बुराई या कट्टरता को देखो... क्या भारतीय त्तात्विक और वैदिक दर्शन इसकी पुष्टि करता है?

अब यहाँ सवाल ये है कि क्या मैं दूसरे धर्म का उपासक हूँ... नहीं ना, तो दूसरा जो करे करता रहे, मेरा धर्म सर्वोच्च है और रहेगा. ये बात हर धर्म के मानने वाले को समझनी होगी. कट्टरता के साथ जीने वाले देश आपके पड़ोस में हैं उनका हाल देख लो. लेकिन कोई समझने को तैयार नहीं है. जो समझे उसे देशद्रोही कह दो, कितना आसान है.


छात्र आन्दोलन वो भी देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का दमन सिर्फ इसलिए किया जा रहा है कि वहां पढने वाला युवा आज सरकार से सवाल पूछ रहा है वह हिम्मत करता है अपने हक मांगने का, नहीं तो फीस वृद्धि को लेकर देश में कई जगह युवा आन्दोलनरत हैं, उनकी आलोचना नहीं होती है. जयप्रकाश नारायण का नवनिर्माण आन्दोलन ऐसे ही युवा छात्रों का आन्दोलन था तब किसी ने उन छात्रों को अराजक या देशद्रोही नहीं कहा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी भी उससे जुड़े रहे. आन्दोलनों पर लाठी चलती है, लेकिन आन्दोलनकारियों को कभी देशद्रोही करार नहीं दिया गया. ये कैसी सत्ता है जो मूकदर्शक हो ये सब की साक्षी है. क्यों शासक इतने भयभीत हैं कि छात्रों के एक आन्दोलन से उनको सत्ता छिनती दिख रही है.


यहाँ बड़ी बात ये है कि देश का अवाम चुप है जैसे उसे कुछ फर्क ही ना पड़ता हो, सवाल करने वालों को ट्रोल कर, उनको गाली दे, उनकी हत्या कर उसको अपना राष्ट्रीय कर्तव्य पूरा हुआ दिखता है. शायद आज आप इन बातों को ना पचा पायें लेकिन आने वाले एक या दो दशक में ही आप खुद को धिक्कारेंगे कि उस समय इन गलत बातों के साथ आप क्यों खड़े थे? आज जो लाठी किसी और कि संतानों पर पड़ रही है कल किसी सवाल के जवाब में आपके बच्चे को भी पड़ेगी. जान लीजिये उस वक्त तक ये लाठी और मजबूत होगी.

आज  पुलिस जिस तरीके से एक दिव्यांग को जूतों से रौंद रही है और आप तालियाँ बजा रहें हैं कल जब इस स्थान पर आपका बच्चा होगा तो क्या करेंगे? सत्ता का मद इतना बुरा होता है कि हर सिर चाहे बाप का ही क्यों ना हो काट दिया जाता है. इतिहास पढ़ लीजिये जनाब, अगला सिर आपका हो तो कोई आश्चर्य मत कीजियेगा.

(आशुतोष पाण्डेय)
नेशनल न्यूजकॉज 

Tuesday, 19 November 2019

ब्रेकिंग: सोनिया गांधी को 10 साल पुरानी टाटा सफारी

एसपीजी सुरक्षा वापस लेने के बाद अब सोनिया गांधी को दी गयी 10 साल पुरानी टाटा सफारी और पुलिस सुरक्षा को लेकर विवाद छिड़ गया है. मंगलवार को संसद में कांग्रेस ने इस मामले को उठाया और पीएम मोदी से सुरक्षा व्‍यवस्‍था में किए गए बदलाव पर जवाब मांगा. यहाँ आपको बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही गांधी परिवार से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को हटा दिया गया था और उन्हें जेड-प्लस सिक्योरिटी दी गई थी. जेड-प्लस सिक्योरिटी के तहत 100 सुरक्षाकर्मी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं. 
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1991 में श्रीलंकाई आतंकवादी समूह ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी. इसके बाद से ही गांधी परिवार को कड़ी सुरक्षा दी जा रही थी. लेकिन वर्तमान सरकार का मानना है कि अब गांधी परिवार को अब किसी विशेष सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है. इसलिए उनकी सुरक्षा कम कर दी गयी है. अब सोनिया गांधी को कोई बुलेट प्रूफ गाड़ी नहीं दी गयी है इसके बजाय 10 साल पुरानी टाटा सफारी दी गयी है. इससे पहले एसपीजी प्रोटेक्शन के दौरान गांधी परिवार की सुरक्षा का जिम्मा वो कमांडो संभालते थे जो सबसे मजबूत और स्मार्ट होते हैं और उन्हें इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग भी दी जाती है. साथ ही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी रेंज रोवर गाड़ि‍यों का उपयोग करती थीं जो किसी किस्‍म के धमाकों से बचने में भी सक्षम होती थीं जबकि राहुल गांधी फॉर्च्यूनर कार का उपयोग करते थे.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा को भी कुछ समय पहले ही कम किया गया है. जिसके बाद उन्हें एसपीजी की तरफ से बख्तरबंद बीएमडब्ल्यू कर दी गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सीआरपीएफ ने एसपीजी से गांधी परिवार को भी बख्तरबंद गाड़ियां देने का अनुरोध किया है लेकिन अब तक एसपीजी ने इसपर कोई जवाब नहीं दिया है.
सरकार के इस कदम से नाराज कांग्रेस के नेताओं ने इस मामले को लेकर आज संसद में हंगामा किया. इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों ने भी कांग्रेस का साथ दिया. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी सामान्य प्रोटेक्टी नहीं हैं. वाजपेयी जी ने भी गांधी परिवार को एसपीजी की प्रोटेक्शन दी थी. 1999 से लेकर 2019 तक कांग्रेस की सरकार 2 बार बनी लेकिन कभी भी गांधी परिवार से एसपीजी कवर की सुरक्षा नहीं हटाई गई. 

Monday, 18 November 2019

वोडाफोन आईडिया का ग्राहकों को तमाचा: महंगी हुई कॉल


                              जिओ के बाद वोडाफोन आईडिया की लूट 
जिओ मोबाइल आने के बाद टेलीकॉम कम्पनियों में टैरिफ को लेकर गला काट प्रतियोगिता शुरू हुयी थी लेकिन 2 साल में ही सब बदलने लगा है पहले जिओ ने दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने के लिए पैसा लेना शुरू किया उसके बाद 1 दिसम्बर से Vodafone Idea भी कॉल दर बढाने वाले हैं. इससे करीब 30 करोड़ यूजर की जेब कटेगी.
वोडाफोन-आइडिया ने टेलीकॉम सेक्टर पर बढ़ते वित्तीय दबाव को इसकी प्रमुख वजह बताया है. वित्तीय संकट के मद्देनजर दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने एक दिसंबर से मोबाइल सेवा की दरें बढ़ाने का फैसला किया है. कम्पनी ने आज यह ऐलान किया है.
वोडाफोन आइडिया ने आज एक बयान में कहा , "अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय डिजिटल अनुभव सुनिश्चित करने के लिए कंपनी एक दिसंबर 2019 से अपने टैरिफ के दाम बढ़ाएगी." अभी कंपनी ने टैरिफ में प्रस्तावित वृद्धि की कोई जानकारी नहीं दी है.
वोडाफोन आइडिया को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में लगभग 50,922 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है. किसी भी भारतीय कंपनी का एक तिमाही में यह अब तक का यह सबसे बड़ा नुकसान है. समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर बकाये के भुगतान के लिये जरूरी प्रावधान किये जाने की वजह से उसे यह नुकसान हुआ है. इस नुकसान को पूरा करने के लिए कम्पनी ग्राहकों की जेब में डाका डालने की तैयारी कर रही है. अभी वोडाफोन आइडिया के पास मोबाइल के लगभग 30% ग्राहक हैं.
(Business Desk)
National News Cause 
देश की आवाज को बेबाकी से उठाना आज आसान नहीं है, इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में आपका सहयोग हमें अच्छे संसाधन और तकनीक के जरिये मुद्दों की तह तक पहुचने में मदद करेगा. आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर हमारी आर्थिक मदद कर सकते हैं.
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Monday, 4 November 2019

WhatsApp अब फ़िंगरप्रिंट से लॉक अनलॉक करें


अगर आप व्हाट्सएप्प का प्रयोग करते हैं तो आपके लिए एक नया सुरक्षा फीचर जारी किया है. अब आप अपने स्मार्टफोन के जरिये व्हाट्सएप्प को फिंगरप्रिंट से लॉक अनलॉक कर पाएंगे.
WhatsApp Fingerprint Lock Feature 
फेसबुक के इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने अपने एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए फिंगरप्रिंट लॉक फीचर को लॉन्च किया है. आईफोन यूज़र्सस के लिए टच आईडी ( फिंगरप्रिंट रिकग्निशन) और फेस आईडी ( फेशियल रिकग्निशन) फीचर फरवरी 2019 से ही उपलब्ध हैं. इसका मतलब अब एंड्राइड मोबाइल यूजर भी WhatsApp के इस नए सुरक्षा फीचर की मदद से ऐप को अनलॉक कर पाएंगे.
WhatsApp Fingerprint Lock for Android
आईफोन यूज़र्स के लिए जैसे टच आईडी फीचर ऐनेबल है उसी तरह अब व्हाट्सऐप एंड्रॉयड यूज़र भी ऐप को अपने फिंगरप्रिंट से लॉक या अनलॉक कर पाएंगे. यूज़र इस बात का भी चुनाव कर सकते हैं कि ऐप बंद होने के कितनी देर बाद खुद-ब-खुद लॉक हो जाए, यहां आपको तीन विकल्प मिलेंगे, पहला है तुरंत, दूसरा है एक मिनट बाद और तीसरा विकल्प है, 30 मिनट बाद. इसके अलावा अब यूज़र इस बात का भी चुनाव कर सकते हैं कि सेंडर का मैसेज नोटिफिकेशन में दिखाई दे या फिर नहीं. 
How can enable Finger Print Lock
WhatsApp Fingerprint Lock को ऐनेबल करने के लिए एंड्रॉयड यूज़र को सेटिंग्स > अकाउंट > प्राइवेसी > फिंगरप्रिंट लॉक में जाना होगा। फिंगरप्रिंट ऑप्शन को ऐनेबल करने के बाद यूज़र को अपना फिंगरप्रिंट कंफर्म करना होगा. दुनियाभर में एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए यह फीचर जल्द रोल आउट किया जा सकता है.

आईफोन यूज़र के पास एक अतिरिक्त फीचर भी है, यूज़र चाहें तो बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए फेस आईडी फीचर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि आईफोन यूज़र्स के लिए इस साल फरवरी में टच आईडी और फेस आईडी विकल्प को ऐनेबल कर दिया गया है. 

Wednesday, 28 August 2019

बिना ओटीपी अब एटीएम से नहीं निकलेंगे पैसे




               एटीएम से पैसे निकालने के लिए ओटीपी जरूरी होगा
आप आये दिन ऑनलाइन और एटीएम फ्रॉड के बारे में सुनते हैं. एटीएम क्लोनिंग, एटीएम पर चिप लगा या कैमरे की मदद से आपके कार्ड का डेटा चोरी करना आम बात है. इन घटनाओं को रोकने के लिए अब बैंक नए सुरक्षा उपायों पर काम कर रहे हैं.

अब आपको हर एटीएम ट्रांसक्शन पर एक ओटीपी आएगा जिसे डालने के बाद ही, आप एटीएम से पैसे निकाल पाएंगे. कैनरा बैंक ओटीपी की इस व्यवस्था को कई एटीएम पर शुरू कर चुका है. ₹10,000 की निकासी अब बिना ओटीपी नहीं हो पाएगी. अब कैनरा बैंक एटीएम से पैसे निकालने के लिए एटीएम पिन के साथ ओटीपी अनिवार्य होगा.
ये ओटीपी बैंक में खाते के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल न० पर एसएमएस के जरिये भेजा जाएगा. एसबीआई के डिप्टी जरनल मैनेजर सुरेश नायर ने मीडिया से बात करते हुए कहा ओटीपी बेस्ड ट्रांसेक्शन को आरम्भ करने जा रहा है.
अन्य बैंक भी जल्द ही एटीएम पर ओटीपी बेस्ड ट्रांसेक्शन आरम्भ करने की तैयारी में हैं.
(आशुतोष पाण्डेय)

Monday, 26 August 2019

रिलेशनशिप सिर्फ औपचारिकता क्यों हो गई?


                   ब्रेकअप कितना आसान, कितना कठिन
रिलेशनशिप एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई जिन्दगी में दो चार होता ही है. रिलेशन बनाना तो आसान होता है लेकिन उनको निभाना और निभा के साथ संतुष्ट होना बिल्कुल अलग बात है. रोज कई रिलेशनशिप ब्रेकअप में बदलती हैं, इसका कारण आपसी सैटिस्फैक्शन की कमी होता है. लेकिन रिलेशनशिप का एक दूसरा आयाम भी है जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर की खुशी के लिए बिना संतुष्टि रिलेशनशिप को बनाये रखता है.
पर्सनालिटी और सोशल साइकोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार ज्यादातर लोग अपने पार्टनर के कारण बिना इच्छा भी रिलेशनशिप में बने रहते हैं, जबकि उनका पार्टनर उम्मीद के अनुसार रोमांटिक नहीं है. काफी चैलेंजिंग परिस्थितियों के बावजूद भी लोग खुद को किसी रिलेशनशिप से अलग नहीं कर पाते हैं. वे अपने पार्टनर के साथ ब्रेकअप नहीं करते हैं क्योंकि उनको लगता है ऐसा करना उनके साथी के लिए ठीक नहीं होगा.
इस स्टडी की ऑथर सामंथा जोएल के अनुसार लोगों को लगता है कि उनका पार्टनर शायद उनसे ब्रेकअप नहीं चाहता है, इसीलिए वे ब्रेकअप नहीं कर पाते हैं.
स्टडी के अनुसार रिलेशनशिप में ज्यादा निर्भर लोग अपने पार्टनर पर ज्यादा विश्वास करते थे और इसीलिए ब्रेकअप पर बात नहीं कर पाते थे. एक्सपर्ट की राय भी इस पर काफी मिलती जुलती है उनके अनुसार प्यार करने वाले प्रेमी या प्रेमिका के लिए ब्रेकअप करना आसान नहीं होता है, एक पार्टनर रिलेशनशिप में खुश है और दूसरा नाखुश तो भो ब्रेकअप आसान नहीं होता है.
(आशुतोष पाण्डेय)

Wednesday, 21 August 2019

स्टेट बैंक के ATM अब बन्द होंगे


                         SBI एटीएम कार्ड अब बन्द होंगे
भारतीय स्टेट बैंक अब प्लास्टिक एटीएम कार्ड को बंद करने वाली हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एटीएम मशीनों को कम करने और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए ये कदम उठा रही है. आज देश में तमाम लोग पेमेंट और पैसे निकालने के लिए एटीएम यानि डेबिट कार्ड का प्रयोग करते हैं. नोटबन्दी के समय एटीएम पर लगी भीड़ और खाली एटीएम से लोग काफी परेशान हुए थे. आज एटीएम के जरिये काफी फर्जीवाड़ा भी होता है, तमाम ठगी की घटनाएं सामने आती हैं कभी डेबिट कार्ड की क्लोनिंग या फिर पिन या फिर ओटीपी के जरिये ठगी आम है.
अब आपको यह बता दें कि कैसे एटीएम कार्ड के बदले ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कैसे किया जाएगा, स्टेट बैंक YONO प्लेटफॉर्म के जरिये ये सभी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और पैसे निकाले जा सकेंगे. SBI के चैयरमैन रजनीश कुमार ने इस बात की जानकारी एक कार्यक्रम मुम्बई में दी.

रजनीश कुमार ने कहा,"हमारी योजना डेबिट कार्ड को प्रचलन से बाहर करने की है. हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि उन्हें हम खत्म कर सकते हैं".
उन्होंने बताया कि देश में 90 करोड़ एटीएम कार्ड और 3 करोड़ क्रेडिट कार्ड हैं.  उन्होंने बताया कि SBI के YONO मशीन के जरिये निकासी या खरीददारी की जा सकेगी. रजनीश कुमार ने बताया कि बैंक पहले ही 68,000 "YONO CASH POINT" की स्थापना की जा चुकी है और अगले 18 महीनों में 10 लाख तक करने की योजना है.
SBI ने इस मार्च महीने में "योनो कैश" सेवा शुरू की थी, जो ग्राहकों को बिना एटीएम कार्ड पैसे निकालने की सुविधा देता है, यह आसान होने के साथ काफी अधिक सुरक्षित भी है.
(आशुतोष पाण्डेय)

Friday, 16 August 2019

आप हैक पासवर्ड प्रयोग कर रहें हैं: गूगल स्टडी



गूगल ने अपनी एक स्टडी में दावा किया है कि इंटरनेट पर प्रयोग आने वाले 1.5% पासवर्ड हैक्ड हो चुके हैं. गूगल ने बताया है की हमने 21 मिलियन यूजरनेम और पासवर्ड्स को स्कैन किए हैं और इनमें से 3.16 लाख से ज्यादा अनसेफ पाए गए हैं.
कंपनी ने कहा है कि डेटा ब्रीच की वॉर्निंग भेजे जाने के बाद 26% यूजर्स ने अपने पासवर्ड बदले लिए हैं. इन नए पासवर्ड्स में से 94% असली पासवर्ड जितने स्ट्रॉन्ग हैं. यहाँ पासवर्ड स्ट्रांग होने का अर्थ ऐसे पासवर्ड से है जिसे आसानी से हैक ना किया जा सके.
गूगल के अनुसार कुछ यूजर्स ने इन वॉर्निंग को इग्नोर भी किया है. ऐसे यूज़र ने अभी भी पासवर्ड नहीं बदला है. गूगल ने इस स्टडी में ये भी देखा है है इंटरनेट यूज़र कई वेब साइट्स के लिए एक ही पासवर्ड का प्रयोग करते हैं जिससे हैकिंग का ख़तरा बढ़ जाता है. एक मज़बूत पासवर्ड बनाने के लिए अल्फ़ाबेट्स के साथ नम्बर और स्पेशल कैरेक्टर का प्रयोग किया जाना चाहिए. समय पर पासवर्ड को बदलते रहें.


(आशुतोष पांडेय)

Thursday, 15 August 2019

दिल्ली में महिलाओं के लिए डीटीसी बस फ्री



73 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली में महिलाओं के लिए 29 अक्टूबर से डीटीसी की सभी बस फ्री होंगी. काफी लंबे समय से केजरीवाल मेट्रो और डीटीसी में महिलाओं की यात्रा मुफ्त करने की योजना पर विचार कर रही थी, लेकिन मेट्रो में दिल्ली सरकार के लिए ये कर पाना सम्भव नहीं था.
अब अरविंद केजरीवाल ने 29 अक्टूबर से महिलाओं के लिए सभी डीटीसी बसें फ्री करने की घोषणा कर दी है. इससे पहले जब केजरीवाल ने ये बात कही थी तो भाजपा और कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने इसका विरोध किया था. उनका मानना है कि इससे राजस्व घाटा बढ़ेगा.
आज जब नेशनल न्यूज़ कॉज के द्वारा जब कुछ कामकाजी महिलाओं से बातचीत की तो सबने इस का समर्थन किया. कामकाजी महिलाएं जो घर से काफी दूर काम के लिए जाती हैं तो उनके टिकट में काफी पैसे खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा कालेज जाने वाली स्टूडेंट्स ने भी इसे लाभदायक बताया है. अरविंद केजरीवाल ने बताया है कि किराया कम नहीं किया गया बल्कि महिलाओं को सब्सिडी दी जा रही है, उनका कहना है जब सरकार टैक्स वसूलती है तो उसकी जिम्मेदारी है कि उसका फायदा सीधे जनता को मिले.

(आशुतोष पाण्डेय)

Monday, 29 July 2019

रेलवे बना रहा है प्लास्टिक की बोतल से टी शर्ट

             अब पानी की खाली बोतलों से कमायेगा रेलवे
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में एक है. लाखों लोग रोज भारतीय रेल में सफर करते हैं. रेल में यात्रा करने वाले यात्री करीब 16 लाख पानी की बोतल प्रतिदिन इस्तेमाल करते हैं इसमें से ज्यादातर प्रयोग के बाद इन्हें फेंक देते हैं. 
अब रेलवे ने इन बोतलों को क्रश कर टी शर्ट और कैप बनाने की सोची है. करीब एक लीटर की 12 बोतलों से एक टी शर्ट तैयार की जाएगी. इसके लिए 2250 स्टेशनों में क्रश मशीन लगवाई जाएंगी. इसका सफल प्रयोग रेलवे पटना जंक्शन पर कर चुका है.
रेलवे बोर्ड की ए डी जी स्मिता वस्त शर्मा ने बताया कि प्रत्येक स्टेशन पर 300 बोतल क्रश की जाएंगी. इस प्रकार 2250 स्टेशनों में 7 लाख बोतल क्रश कर 58 हजार टी शर्ट बनाई जा सकेंगी. 
इस प्रकार बनने वाली टी शर्ट आम टी शर्ट से ज्यादा मजबूत होंगी और इनकी बिक्री से रेलवे को आय बढ़ाने का एक तरीका भी मिल जाएगा.  
(आशुतोष पांडेय)

Sunday, 28 July 2019

क्या असल खबर मिलती है आपको

खबर किसी घटना की सूचना देना मात्र ही नहीं है खबर एक जिम्मेदारी है. आपको क्या लिखना है या दिखाना ये आपके विवेक पर निर्भर करता है. सनसनी को खबर नहीं, शरारत या फिर कमाई का तरीका कहिये. हर समय आपके समाज में या चारों ओर हजारों घटनाएं घटती हैं सबको लिख लेना या दिखाना ना तो संभव है और न ही ऐसा कोई प्रयास किया जाना चाहिए.

खबर ऐसी हो जिससे पाठक खुद को जोड़ सके समाज पर उसका नकारात्मक असर ना हो। आज खबर का मूल खोता जा रहा है. हमने खबर को एक सूचना या सनसनी मान लिया है.
रिपोर्टिंग आज दम तोड़ रही है, रिपोर्टिंग को कट कॉपी पेस्ट बना दिया गया है. प्रिंट मीडिया जिसने रिपोर्टिंग और खबरों का एक मानक तय किया गया था आज डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दम तोड़ चुका है.
आज खबर को मीडिया हाउस के लिए कमाई का जरिया बना दिया गया है। खबर के साथ एक्सक्लूसिव और ब्रेकिंग लगाकर उसे बेचा जाता है. लोकतंत्र का ये चौथा स्तम्भ अपनी शक्ति और उपादेयता खोता जा रहा है. एक नजर न्यूज़ चैनेल्स पर डालिये कहीं खबर की आत्मा नहीं दिखती है केवल सनसनी बेची जाती है.
नेशनल न्यूज़कॉज ने एक कोशिश की है लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को एक प्रतिष्ठता देने की। हम एक डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं, प्रेस जैसे किसी शब्द को खुद को जोड़ने की चेष्टा हम नहीं करते हैं क्योंकि हम जानते हैं यदि कंटेंट में दम होगा तो आपका प्यार मिलेगा.
इस हेतू आपके सुझाव और विचार हमें नए कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित करेगा.
(आशुतोष पांडेय)

Saturday, 27 July 2019

स्मार्टफोन कैसे ले सकता है आपकी जान

                        लाइफस्टाइल और आपका स्मार्टफोन
स्मार्टफोन आज हम सब की जरूरत है. आज स्मार्टफोन लाइफस्टाइल का एक हिस्सा बन चुका है. लेकिन यही लाइफस्टाइल आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है. हर दिन 5 घण्टे से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल आपको कई जानलेवा बीमारियां भी दे सकता है. मोटापा और दिल से सम्बंधित कई बीमारियां आपको घेर सकती हैं. 
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कोलम्बिया की साइमन बोलिवर यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता मिरारी मैंटिला मैरोन के अनुसार लोगों को स्मार्टफोन के यूज के खतरों की जानकारियां भी होनी चाहिए. मैंटिला मैरोन के अनुसार शोध में ये बात साबित हो चुकी है कि दिन में 5 घण्टे से ज्यादा मोबाइल या स्मार्टफोन का प्रयोग करने से मोटापा बढ़ता है. एक शोध जो 19 से 20 साल की औसत उम्र के 1060 स्टूडेंट्स पर किया गया जिसमें 700 लड़कियां और 360 लड़कों को शामिल किया गया था. इस शोध से ये बात सामने आई कि 5 घण्टे से ज्यादा स्मार्टफोन के इस्तेमाल से मोटापे का खतरा 43 प्रतिशत बढ़ जाता है. 
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इसी शोध में लाइफस्टाइल से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं. दिन भर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले सामान्य की तुलना दुगुना जंक फूड, शुगर और स्नैक्स का सेवन कर लेते हैं. इसके अलावा ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले फिजिकली भी कम एक्टिव होते हैं.
5 घण्टे से ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों में 26 प्रतिशत ओवरवेट श्रेणी में आये. फिजिकल एक्टिविटी रेट कम होने के कारण प्री मैच्योर डेथ, डाइबिटीज, दिल की बीमारी और कई प्रकार के कैंसर के शिकार आप हो सकते हैं.
(आशुतोष पांडेय)

गूगल पर 3.45 अरब का मुकदमा

                                          विश्व हलचल
"गूगल" यानि दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन इस पर 3 अरब रूपये का मुकदमा करने वाली तुलसी गैबार्ड कौन हैं? क्यों ये मुकदमा किया गया है.
तुलसी गैबार्ड अगले साल होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवार की दौड़ में शामिल हैं. अब उन्होंने गूगल पर 5 करोड़ डॉलर यानि 3.45 अरब का मुकदमा लॉस एंजिलिस कोर्ट में दायर किया है. 
कौन हैं तुलसी गब्बार्ड 
तुलसी अमेरिका की पहली हिन्दू सांसद भी हैं. उन्होंने गूगल पर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार में उनके साथ भेदभाव करने पर ये मुकदमा किया है. उनका आरोप है कि गूगल ने उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को बाधित किया है. जून में उनकी पहली डेमोक्रेटिक डिबेट के बाद उनके अभियान से जुड़े विज्ञापन को 6 घण्टे के लिए रोक दिया था. ऐसा दो बार किया गया है, एकाउंट सस्पेंड होने के कारण आम आदमी तक उनकी पहुंच और मिलने वाले चंदे पर भी काफी असर पड़ा है. गूगल ने तुलसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ये एक ऑटोमेटिक प्रोसेस है।
(आशुतोष पाण्डेय)

Friday, 26 July 2019

RTI संशोधन बिल: क्या वास्तव में इसे कमजोर करेगा

                      आरटीआई संशोधन बिल 2018
नई दिल्ली, आरटीआई राइट टू इनफार्मेशन 2005 ने देश की जनता को सरकार और उसके आनुषंगिक अंगों से जुड़ी सूचनाएं जानने का अधिकार दे दिया था. इसके बाद आरटीआई के जरिये कई कई बड़े खुलासे किए गए, कई आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या भी की गयी. ऐसा नहीं है कि हर बार इसका प्रयोग ठीक तरीके से ही किया गया हो कई बार तो व्यक्तिगत मामलों या फिर ब्लैकमेलिंग के लिए भी इसका प्रयोग किया गया। 

क्या मोदी सरकार ने आरटीआई को कमजोर किया?
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ये आरोप आम हो गए कि सरकार और सरकारी विभाग; सूचना सही तरीके से उपलब्ध नहीं करवा रहें हैं. कुछ मुद्दों पर विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली विश्वविद्यालय की डिग्री को लेकर दायर आरटीआई का जवाब दिल्ली विश्वविद्यालय ने नहीं दिया, जबकि अन्य कई ऐसे ही डिग्रियों के बारे में लगी आरटीआई के जवाब दिल्ली और अन्य विश्वविद्यालय द्वारा इस दौरान दिया गया है.
ताजा विवाद
अब ताजा विवाद आरटीआई में संशोधन बिल को लेकर है. सरकार अब इस बिल को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और फिर राज्यसभा में पास करवा चुकी है. असल में आम आदमी को ये मालूम नहीं है कि वर्तमान संशोधन क्या है? जब हमने इस बाबत कुछ लोगों से बात की तो उनका कहना था कि आरटीआई की आत्मा को मारने की कोशिश की कोशिश की जा रही है, लेकिन कैसे ये बता पाने में वे असमर्थ थे. असल में सोशल मीडिया में चल रहे संदेशो की वजह से ही ये सब हो रहा है. 
Courtesy : Google Photo 
क्या है ये संशोधन?
आइये अब बात करते हैं क्या है इस संशोधन में? इस विधेयक के अनुसार केन्द्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन और कार्यकाल को अब केंद्रीय सरकार द्वारा तय किया जाएगा. यहां विश्लेषकों और आरटीआई एक्टिविस्ट का ये मानना है कि सरकार जब चाहे किसी भी सूचना आयुक्त के कार्यकाल को खत्म कर सकती है. इस संशोधन के बाद आरटीआई में अन्य मनमाने संशोधन भी करवाये जा सकते हैं जिससे आरटीआई की आत्मा पर प्रहार होगा और ये कानून कुंद हो जाएगा. विपक्ष इसे राज्यसभा में लाने से पहले सलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की थी। लेकिन अब जब ये विधेयक कम संख्या बल होते हुए भी राज्यसभा में पास हो गया है तो ये तो जरूर कहा जा सकता है कि विपक्ष अपनी किसी भी रणनीति में सफल नहीं हो रहा है. ये संसदीय व्यवस्था को बड़ी चुनौती है.
(आशुतोष पाण्डेय)

Thursday, 25 July 2019

क्रिकेट: टीम इंडिया को मिला नया स्पॉन्सर ओप्पो की छुट्टी

नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने ऑनलाइन कोचिंग शिक्षा प्रदान करने वाली कंपनी BYJU को भारतीय टीम का मुख्य प्रायोजक बनाए जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. यह कंपनी अब भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर मोबाइल बनाने वाली कंपनी OPPO का स्थान लेगी. यह कंपनी 5 सितंबर 2019 से 31 मार्च 2022 तक भारतीय टीम की आधिकारिक प्रायोजक रहेगी.
इस प्रकार टीम इंडिया को एक नया स्पॉन्सर मिल गया है. BYJU अब सितंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली घरेलू सीरीज से भारतीय टीम की जर्सी पर दिखाई देगी. बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने BYJU को भारतीय टीम की आधिकारिक मुख्य प्रायोजक बनने की घोषणा करते हुए कहा, 'भारतीय टीम के साथ जुड़े रहने के लिए बीसीसीआई की तरफ से मैं OPPO को धन्यवाद देता हूं. भारतीय टीम का नया प्रायोजक बनने पर मैं BYJU को भी बधाई देता हूं. भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए बीसीसीआई और BYJU अब मिलकर काम करेंगे.'
बीसीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार इस डील में बीसीसीआई को उतनी ही रकम मिलेगी, जितनी OPPO कंपनी दे रही थी. इसमें उसे कोई घाटा नहीं होने वाला है. ये डील 31 मार्च 2022 तक चलेगी. BYJU की स्थापना केरल के एक उद्यमी बायजू रविंद्रन ने की है.
(आशुतोष पांडेय

Thursday, 4 July 2019

बिन सोशल मिडिया आपकी दुनिया सूनी

24 घंटे पहले एकाएक सभी सोशल प्लेटफॉर्म एक साथ सुस्त पड़ गये, इस दौरान यूजर्स का हाल देखने वाला था, फेसबुक और व्हाट्सएप्प तो और भी बुरा हाल था. ना ही फाइल भेजी जा रही थी ना ही डाउनलोड हो रही थी. ये समस्या भारतीय समयानुसार रात के करीब 8.30 बजे से शुरू हुई. लगभग 9 घंटे बाद ये समस्या खुद ठीक हो गई है. फेसबुक ने ट्वीट करके कहा है कि कुछ लोगों को वीडियो, पिक्चर फाइलें भेजने में परेशानी हुई. फेसबुक ने अपने यूजर्स को हुई परेशानी के लिए खेद जताते हुए कहा कि हम 100 प्रतिशत वापस आ गए हैं, आप लोगों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है. 1 अरब यूजर्स से ज्यादा फेसबुक पर फोटोज नहीं देख पा रहे हैं, डाउनलोड भी नहीं कर पा रहे हैं. ट्विटर पर कुछ यूजर्स ये भी आशंका जता रहे थे कि रूस या चीन ने अमेरिकी कंपनी फेसबुक पर साइबर अटैक करवाया है.

व्हाट्सएप्प  में कोई यूजर्स किसी को फोटो भेज नहीं पा रहे हैं और न ही स्टेटस में लगी फोटो ही देख पा रहे थे.
यही समस्या से इन्स्टाग्राम यूजर भी जूझ रहे थे.
फेसबुक, मैसेंजर, वॉट्सऐप और इंस्टा में पहली बार दिक्कत नहीं आई है, ऐसा कई बार होता है जब ये प्लेटफॉर्म धीमे पड़ जाते है लेकिन इस बार फोटोज में दिक्कत आ रही है. फोटोज की जगह फोटो नहीं दिख रही है, बल्कि उस फोटो की डीटेल्स दिख रही है. जैसे उस फोटो में कौन क्या कर रहा है? यहां तक कि उस फोटो में कोई शख्स हंस रहा है या बातें कर रहा है, इस तरह की भी डीटेल्स मिल रही हैं.
ये वास्तव में कोई सायबर अटैक था या नहीं इसके बारे में अभी कोई डिटेल नहीं मिली हैं लेकिन बिन सोशल मीडिया यूजर काफी परेशान रहे. 

Thursday, 30 May 2019

नयी नमो टीम: क्या नया



भारी बहुमत से जीतने के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमन्त्री के रूप में दूसरी पारी शुरू करेंगे. 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में भाजपा और NDA गठबंधन को भारी बहुमत मिला है. NDA के पास 352 सीटें हैं जो बहुमत से 80 ऊपर हैं. इसमें भाजपा के पास अपने 303 सांसद हैं. पिछली बार से भाजपा का वोट प्रतिशत और सीटें दोनों बढ़ी हैं.
मोदी मंत्रिमंडल में इस बार लगभग 20% नये चेहरे दिखेंगे. सूत्रों की माने तो इस बार मंत्रिमंडल में 60 से 70 मंत्रियों को शपथ दिलवाई जायेगी. अरूण जेटली पहले ही मंत्री पद लेने से इनकार कर चुके हैं. मीडिया में सबसे ज्यादा कयास अमित शाह को लेकर लगाए जा रहें हैं, भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार शाह पहली बार लोकसभा में आये हैं.

मोदी के सबसे विश्वस्त होने के कारण उनको बड़ी जिम्मेदारी देने की बात कही जा रही है. कई विश्लेषक कह रहें हैं अमित शाह को भाजपा अध्यक्ष ही रहने दिया जाएगा क्योंकि उनकी अध्यक्षता में भाजपा ने कई बड़ी जीत हासिल की हैं

जिन सांसदों का मंत्री बनना तय है उनमें प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद, राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी का नाम लिया जा रहा है. नये चेहरों पर अभी कयास ही लगाये जा रहें हैं. NDA के अन्य घटक दलों को भी मंत्रीमंडल में शामिल किया जाना है.

इस दूसरी पारी में भारी बहुमत के साथ मोदी के सामने कई चुनौतियां भी हैं. राममन्दिर भाजपा का एक प्रमुख मुद्दा रहा है, वैसे इस चुनाव में कोई भी मुद्दा ख़ास मुखर नहीं था. पर इस बार राममन्दिर पर मोदी को कटघरे में खड़ा किया जाएगा, इसके अलावा कश्मीर और आतंकवाद से मुकाबला भी बड़ी चुनौती होगी.
(आशुतोष पाण्डेय)

Thursday, 4 April 2019

एक फ़कीर और लाखों का सूट: मन की बात



बात की बात, बात का बतंगड़ और अब मन की बात पाँच सालों में भारतीय राजनीति ने  कुछ दिया हो या ना दिया हो हमारे प्रधानमंत्री ने मन की बात खूब की है. ये लोकतंत्र का दस्तूर है पाँच साल नेता कहेंगे और जनता सुनेगी लेकिन उपर वाले के घर में देर है अंधेर नहीं. पांच  सालों के बाद कुछ दिन जनता कहती है और नेता सुनते है. यही दिन आजकल चल रहें है.
अब देखिये ये कोई पड़ोसी शर्मा जी तो हैं नहीं जो रोज नुक्कड़ पर मिल जाएँ, ना ही कालोनी के गेट पर बावस्ता चौकीदार जो रोज सैलूट ठोके. ये तो ठहरे पक्के निराकारी. निराकार ब्रह्म जिनके पास एक फकीर वाला झोला भी होता है. पन्द्रह लाख के सूट पर फकीर का झोला, लाखों के मशरूम का भोग. क्या कहें साहिब सबके मित्र इनके चर्चे विचित्र. प्रतिभा इतनी विलक्षण की इनकी सरकार में कानपुर में सैकड़ों बच्चे बिना ऑक्सीजन मर गये लेकिन इनको इसमें भी नेहरू का कारनामा दिखा. सत्तर सालों में क्या हुआ सब दिखता है इनको.
नमो! नमो! इनके पास भक्तों की एक फ़ौज है, जिसकी आत्ममुग्धता देखो, कुछ तो यह कह देते हैं कि इसी निराकारी फकीर ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ा है. हाँ ये फकीर एक मार्गदर्शक मंडल भी रखते हैं लेकिन उसका हाल बीड़ी के बंडल से भी गया गुजरा है. "अथातो घुम्मकड जिज्ञासा" "बिरयानी का शौक", "माँ का त्याग", "पत्नी का त्याग" क्या नहीं है इस निराले फकीर के पास.

पाँच साल पहले "चाय पर चर्चा" के बाद अब "चौकीदार चौकन्ना" नया अवतार है, वैसे भी ये देश में अवतार आम बात है. एक ख़ास बात भगवान राम के नाम पर सत्ता में आये थे, लेकिन फकीर तो राम के नाम पर चाय वाले से चौकीदार बन गया. हाफ पेंट से पन्द्रह लाख के सूट तक का सफर तय कर गया लेकिन भगवान राम टेंट में ही हैं.राम के भक्तों से ज्यादा इस वक्त इस फकीर के चेले बताये जाते है. सबका साथ सबका विकास ये इनका मूल वाक्य है, और इस पर साहिब खरे भी उतरे हैं. अम्बानी, अदानी, नीरव, सुशील मोदी, माल्या जैसों का साथ और विकास की कई कहानियाँ इनके इर्द गिर्द बुनी जाती है. इस पाँच साली चुनावी कुम्भ में ये फकीर क्या नये नये अवतार लेंगें ये देखना है, इनकी सेना भी है, जिसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना इनके भक्त कहते हैं.
वैसे इस देश में ये अकेले नहीं हैं इनके जैसे कई अवतार हैं जिनकी फेहरिस्त लम्बी है. 

Sunday, 10 March 2019

लोकसभा का दंगल कब, और कैसे?


लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व लोकसभा चुनाव जल्द ही होने हैं। सभी सियासी दलों की धड़कनें तेज हैं, जनता को रिझाने के लिए कई कोशिश की जा रही हैं, कोई राफेल में भ्रष्टाचार पर अपनी गुगली फेंक रहा है तो वहीं कोई सेना और जवानों के कंधे पर बंदूक रख चुनाव जीतना चाह रहा है। सभी सियासी दलों और देश की जनता को चुनावों के घोषणा का इन्तजार है।
आज शाम 5 बजे तक चुनाव आयोग अगले लोकसभा चुनावों के लिए कार्यक्रम का ऐलान कर सकता है। आज शाम 5 बजे विज्ञान भवन में चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
लोकसभा चुनाव के साथ ही 5 राज्यों आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भी हो सकता है. लोकसभा के चुनाव 7 से 8 चरणों में हो सकते हैं।

चुनाव आयोग की भाजपा को लंगडी

अभी लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई नहीं है, लेकिन राजनैतिक दल प्रचार के नये हथकंडे ढूढने लगे हैं. इस सब में भाजपा सबसे आगे है, प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से जबर्दस्त चुनावी मोड में आ गये हैं. हाल ही में हुयी एयर स्ट्राइक के बाद तो भाजपा ने सैनिकों के नाम पर खुली राजनीति शुरू कर दी है.
बैनर या पोस्टर या फिर मंच हर जगह सैनिकों की शहादत और वीरता का प्रचार सरकार के नाम के साथ जोड़ कर किया जा रहा है. इस पर रक्षा मंत्रालय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कुछ राजनितिक दलों के द्वारा सैनिकों के नाम और फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में करने की शिकायत की थी.
चुनाव आयोग की ओर जारी बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से यह संज्ञान में लाया गया था कि कुछ राजनीतिक दल सुरक्षाबल के जवानों की फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार और राजनीतिक प्रोपेगेंडा के लिए कर रहे हैं. कई शहीदों के परिवार ने भी नेताओं से ऐसे किसी प्रचार से बचने का निवेदन किया था.
इसी का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को पत्र लिख जवानों के फोटो का इस्तेमाल ना करने निर्देश जारी किया है. चुनाव आयोग की यह एडवाइजरी राजनीतिक दलों को सतर्क करने के लिए जारी की गई है. इसमें कहा गया है कि सुरक्षाबल देश की सीमाओं, क्षेत्र और पूरे राजनीतिक तंत्र के प्रहरी हैं. लोकतंत्र में उनकी भूमिका निष्पक्ष और गैर राजनीतिक है. इसी वजह से जरूरी है कि चुनाव प्रचार में सुरक्षाबलों का जिक्र करते हुए राजनीतिक दल और राजनेता सावधानी बरतें.
Courtesy: Google Search 
पुलवामा आतंकी हमले के बाद से भाजपा नेताओं के कई मंचों पर शहीद जवानों के फोटो लगाए गए थे. इसके बाद वायु सेना के पायलट अभिनंदन की फोटो का इस्तेमाल भी चुनावी पोस्टरों और सोशल मीडिया कैंपेन में हो रहा है. ऐसे प्रचार पर कुछ दलों ने आपत्ति भी जताई थी और आयोग से इसकी शिकायत करने की बात भी कही थी. भाजपा ने तो मोदी और अमित शाह के साथ "मोदी है तो मुमकिन है" जैसे नारों के साथ कई होर्डिंग देश भर में लगाएं हैं. 
चुनाव आयोग के इस निर्देश को कितने दल मानते हैं पता नहीं. आयोग ने साफ़ कहा है कि आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसे किसी भी मामले में कार्रवाई की जायेगी. 

Saturday, 9 March 2019

सोनिया, राहुल, प्रियंका, अगला कौन!

आजादी के बाद से ही देश की राजनीति एक परिवार के चारों ओर घूमती रही है, वैसे तो कांग्रेस ने आजादी के आन्दोलन या उसके बाद भी कई बड़े नेता देश को दिए हैं लेकिन सत्ता का मध्यबिंदु नेहरू गांधी परिवार ही रहा है. चाहे सत्ता में हो या फिर सत्ता से बाहर राजनीति इसी परिवार के इर्द गिर्द घूमती है.
देश में दो प्रकार का मानस ही है एक वो जो इनके साथ है और दूसरा वो जो इनके खिलाफ है. पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने काफी कुछ गवांया है. आज कांग्रेस के पास अपनी कोई पुख्ता जमीन नहीं है लेकिन सत्ताभोग कर रही भाजपा और प्रधानमन्त्री मोदी ने रोज इस परिवार का जाप किया है. उनकी असली लड़ाई ये साबित करने की रही है कि इस परिवार ने देश को लूटा है. नेहरू से लेकर अब प्रियंका को भाजपा और उसके दिग्गज लगातार निशाना बना रहें हैं. इसका मतलब क्या है? जनता को समझना होगा.
इससे पहले एक ताजे वाकये पर भी विचार करते हैं, पिछले पांच सालों में देश की राजनीति में एक नाम और उभरा वो है अरविन्द केजरीवाल, कोई अरविन्द को आन्दोलन या संघर्ष की पैदायश कहे लेकिन ये सच है कि कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल  के ही अरविन्द यहाँ तक पहुँच पाया, कांग्रेस  की कमजोरियों के बल पर दिल्ली में प्रचंड बहुमत पाने अब कांग्रेस की गोद में छुपने के लिए प्रलाप कर रहें हैं, ये कांग्रेस की असल ताकत है.
कांग्रेस कभी सत्ता के शॉर्टकट पर विश्वास नहीं करती है, उसे मालूम है कि देर या सबेर राजनीति का सूरज उसके आँगन में आना ही है.
हाल में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में 3 राज्यों में भाजपा को हटा सत्ता में लौटी कांग्रेस ने कहीं कोई अति नहीं की, वो जानते हैं लोकतंत्र में सत्ता आती जाती रहती है, बस अस्तित्व बनाए रखें. अब आते हैं नेहरू गांधी खानदान के वर्तमान प्रवर्तकों पर, सोनिया गांधी पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधी की पत्नी उनके साथ विरोधियों ने कई गंदे और भद्दे अलंकार जोड़े लेकिन सोनिया बिना किसी विरोध किये अपना काम करती रही. सोनिया को कभी किसी ने आक्रामक होते नहीं देखा लेकिन कांग्रेस को बनाए रखने में उनकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण है.  राहुल गांधी जिनके बारे में मोदी जी भी रोज टिप्पणी करते हैं कई बार दिन में मोदी जी राहुल को मंदबुद्धि कहते हैं. लेकिन राहुल भी सोनिया की तर्ज पर शांत राजनीति पर विश्वास करते हैं, लेकिन कुछ समय से उन्होंने आक्रामक तेवर इख्तियार किये हैं, लगता है राहुल इस बात को समझ गये हैं कि किसी झूठ को बार बार जोर से बोला जाय तो जनता उसे सच मान लेती है. खैर अब कांग्रेस में एक नयी ऊर्जा दिख रही है राहुल कि लोकप्रियता जनता में तेजी से बढी है.

प्रियंका वाड्रा अभी सक्रिय राजनीति में आयी हैं इसका मतलब ये नहीं कि वे राजनीति में फिद्दी होंगी, प्रियंका की स्वीकार्यता जनता और पार्टी में किसी भी नेता के मुकाबले ज्यादा है, उनके आने के बाद कांग्रेस का स्लीपिंग वोटर भी जागा है, पुराने टोपी लगाने वाले बुजुर्ग नेता और कार्यकर्त्ता भी चार्ज हुए हैं. लेकिन कांग्रेस की अगली पौध कहाँ से आयेगी ये बड़ा सवाल है, अगला कौन?

Thursday, 7 March 2019

चौकीदार चौकन्ना है और राफेल की फाइलें गुम हो गयी

जल्द ही अगली लोकसभा के चुनाव होने हैं ऐसे में सियासी घमासान तेज हैं. एक ओर भाजपा खडी है दूसरी ओर समूचा विपक्ष. पिछले पांच सालों में भाजपा और मोदी शाह की टीम ने राजनीति को शह और मात का खेल बना दिया है.
लोकतंत्र में आज सवाल करना एक अपराध और देश द्रोह माना जा रहा है. अब जब खुद भारत सरकार या सीधे शब्दों में कहें चौकन्ने चौकीदार की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये माना है कि राफेल की सीक्रेट फाइल चोरी हो गयी हैं. ये बात कोर्ट में अटोर्नी जर्नल वेणुगोपाल ने कही है.
सुप्रीम कोर्ट में वेणुगोपाल कहते हैं कि इसकी जांच हो रही  है कि फाइल कैसे चोरी हुयी हैं. वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट में जब ये कहते हैं कि, "यदि अब सीबीआई को जांच के निर्देश दिए जातें हैं, तो देश को भारी नुकसान होगा".
सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब राफेल सौदे से सम्बन्धित फैसला सुनाया था तो सरकार की ओर से कई तथ्यों को छुपाया गया था. जब प्रशांत भूषण ने हिन्दू में छपे एक लेख का हवाला दिया तो वेणुगोपाल ने कहा ये लेख चोरी कि गयी फाइल के आधार पर लिखा गया है और इस मामले की जांच जारी है.

यहाँ देखने वाली बात ये है कि विपक्ष विशेषकर कांग्रेस लगातार राफेल सौदे को लेकर सवाल उठा रही है. मोदी जी बार बार जनता के बीच इसे एक षड्यंत्र बता रहे हैं. लेकिन अब जब अटॉर्नी जरनल वेणुगोपाल खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि दस्तावेज गायब हैं तो भाजपा इसे सियासी षड्यंत्र बता रही है. अब वेणुगोपाल खुद इस सियासी षड्यंत्र में शामिल हैं या फिर कांग्रेस के आरोप सही हैं. ये बात जनता को ही समझनी होगी.
(नेशनल न्यूज कॉज )