Sunday, 10 March 2019

चुनाव आयोग की भाजपा को लंगडी

अभी लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई नहीं है, लेकिन राजनैतिक दल प्रचार के नये हथकंडे ढूढने लगे हैं. इस सब में भाजपा सबसे आगे है, प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से जबर्दस्त चुनावी मोड में आ गये हैं. हाल ही में हुयी एयर स्ट्राइक के बाद तो भाजपा ने सैनिकों के नाम पर खुली राजनीति शुरू कर दी है.
बैनर या पोस्टर या फिर मंच हर जगह सैनिकों की शहादत और वीरता का प्रचार सरकार के नाम के साथ जोड़ कर किया जा रहा है. इस पर रक्षा मंत्रालय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कुछ राजनितिक दलों के द्वारा सैनिकों के नाम और फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में करने की शिकायत की थी.
चुनाव आयोग की ओर जारी बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से यह संज्ञान में लाया गया था कि कुछ राजनीतिक दल सुरक्षाबल के जवानों की फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार और राजनीतिक प्रोपेगेंडा के लिए कर रहे हैं. कई शहीदों के परिवार ने भी नेताओं से ऐसे किसी प्रचार से बचने का निवेदन किया था.
इसी का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को पत्र लिख जवानों के फोटो का इस्तेमाल ना करने निर्देश जारी किया है. चुनाव आयोग की यह एडवाइजरी राजनीतिक दलों को सतर्क करने के लिए जारी की गई है. इसमें कहा गया है कि सुरक्षाबल देश की सीमाओं, क्षेत्र और पूरे राजनीतिक तंत्र के प्रहरी हैं. लोकतंत्र में उनकी भूमिका निष्पक्ष और गैर राजनीतिक है. इसी वजह से जरूरी है कि चुनाव प्रचार में सुरक्षाबलों का जिक्र करते हुए राजनीतिक दल और राजनेता सावधानी बरतें.
Courtesy: Google Search 
पुलवामा आतंकी हमले के बाद से भाजपा नेताओं के कई मंचों पर शहीद जवानों के फोटो लगाए गए थे. इसके बाद वायु सेना के पायलट अभिनंदन की फोटो का इस्तेमाल भी चुनावी पोस्टरों और सोशल मीडिया कैंपेन में हो रहा है. ऐसे प्रचार पर कुछ दलों ने आपत्ति भी जताई थी और आयोग से इसकी शिकायत करने की बात भी कही थी. भाजपा ने तो मोदी और अमित शाह के साथ "मोदी है तो मुमकिन है" जैसे नारों के साथ कई होर्डिंग देश भर में लगाएं हैं. 
चुनाव आयोग के इस निर्देश को कितने दल मानते हैं पता नहीं. आयोग ने साफ़ कहा है कि आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसे किसी भी मामले में कार्रवाई की जायेगी. 

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