Saturday, 9 March 2019

सोनिया, राहुल, प्रियंका, अगला कौन!

आजादी के बाद से ही देश की राजनीति एक परिवार के चारों ओर घूमती रही है, वैसे तो कांग्रेस ने आजादी के आन्दोलन या उसके बाद भी कई बड़े नेता देश को दिए हैं लेकिन सत्ता का मध्यबिंदु नेहरू गांधी परिवार ही रहा है. चाहे सत्ता में हो या फिर सत्ता से बाहर राजनीति इसी परिवार के इर्द गिर्द घूमती है.
देश में दो प्रकार का मानस ही है एक वो जो इनके साथ है और दूसरा वो जो इनके खिलाफ है. पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने काफी कुछ गवांया है. आज कांग्रेस के पास अपनी कोई पुख्ता जमीन नहीं है लेकिन सत्ताभोग कर रही भाजपा और प्रधानमन्त्री मोदी ने रोज इस परिवार का जाप किया है. उनकी असली लड़ाई ये साबित करने की रही है कि इस परिवार ने देश को लूटा है. नेहरू से लेकर अब प्रियंका को भाजपा और उसके दिग्गज लगातार निशाना बना रहें हैं. इसका मतलब क्या है? जनता को समझना होगा.
इससे पहले एक ताजे वाकये पर भी विचार करते हैं, पिछले पांच सालों में देश की राजनीति में एक नाम और उभरा वो है अरविन्द केजरीवाल, कोई अरविन्द को आन्दोलन या संघर्ष की पैदायश कहे लेकिन ये सच है कि कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल  के ही अरविन्द यहाँ तक पहुँच पाया, कांग्रेस  की कमजोरियों के बल पर दिल्ली में प्रचंड बहुमत पाने अब कांग्रेस की गोद में छुपने के लिए प्रलाप कर रहें हैं, ये कांग्रेस की असल ताकत है.
कांग्रेस कभी सत्ता के शॉर्टकट पर विश्वास नहीं करती है, उसे मालूम है कि देर या सबेर राजनीति का सूरज उसके आँगन में आना ही है.
हाल में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में 3 राज्यों में भाजपा को हटा सत्ता में लौटी कांग्रेस ने कहीं कोई अति नहीं की, वो जानते हैं लोकतंत्र में सत्ता आती जाती रहती है, बस अस्तित्व बनाए रखें. अब आते हैं नेहरू गांधी खानदान के वर्तमान प्रवर्तकों पर, सोनिया गांधी पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधी की पत्नी उनके साथ विरोधियों ने कई गंदे और भद्दे अलंकार जोड़े लेकिन सोनिया बिना किसी विरोध किये अपना काम करती रही. सोनिया को कभी किसी ने आक्रामक होते नहीं देखा लेकिन कांग्रेस को बनाए रखने में उनकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण है.  राहुल गांधी जिनके बारे में मोदी जी भी रोज टिप्पणी करते हैं कई बार दिन में मोदी जी राहुल को मंदबुद्धि कहते हैं. लेकिन राहुल भी सोनिया की तर्ज पर शांत राजनीति पर विश्वास करते हैं, लेकिन कुछ समय से उन्होंने आक्रामक तेवर इख्तियार किये हैं, लगता है राहुल इस बात को समझ गये हैं कि किसी झूठ को बार बार जोर से बोला जाय तो जनता उसे सच मान लेती है. खैर अब कांग्रेस में एक नयी ऊर्जा दिख रही है राहुल कि लोकप्रियता जनता में तेजी से बढी है.

प्रियंका वाड्रा अभी सक्रिय राजनीति में आयी हैं इसका मतलब ये नहीं कि वे राजनीति में फिद्दी होंगी, प्रियंका की स्वीकार्यता जनता और पार्टी में किसी भी नेता के मुकाबले ज्यादा है, उनके आने के बाद कांग्रेस का स्लीपिंग वोटर भी जागा है, पुराने टोपी लगाने वाले बुजुर्ग नेता और कार्यकर्त्ता भी चार्ज हुए हैं. लेकिन कांग्रेस की अगली पौध कहाँ से आयेगी ये बड़ा सवाल है, अगला कौन?

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