Thursday, 4 April 2019

एक फ़कीर और लाखों का सूट: मन की बात



बात की बात, बात का बतंगड़ और अब मन की बात पाँच सालों में भारतीय राजनीति ने  कुछ दिया हो या ना दिया हो हमारे प्रधानमंत्री ने मन की बात खूब की है. ये लोकतंत्र का दस्तूर है पाँच साल नेता कहेंगे और जनता सुनेगी लेकिन उपर वाले के घर में देर है अंधेर नहीं. पांच  सालों के बाद कुछ दिन जनता कहती है और नेता सुनते है. यही दिन आजकल चल रहें है.
अब देखिये ये कोई पड़ोसी शर्मा जी तो हैं नहीं जो रोज नुक्कड़ पर मिल जाएँ, ना ही कालोनी के गेट पर बावस्ता चौकीदार जो रोज सैलूट ठोके. ये तो ठहरे पक्के निराकारी. निराकार ब्रह्म जिनके पास एक फकीर वाला झोला भी होता है. पन्द्रह लाख के सूट पर फकीर का झोला, लाखों के मशरूम का भोग. क्या कहें साहिब सबके मित्र इनके चर्चे विचित्र. प्रतिभा इतनी विलक्षण की इनकी सरकार में कानपुर में सैकड़ों बच्चे बिना ऑक्सीजन मर गये लेकिन इनको इसमें भी नेहरू का कारनामा दिखा. सत्तर सालों में क्या हुआ सब दिखता है इनको.
नमो! नमो! इनके पास भक्तों की एक फ़ौज है, जिसकी आत्ममुग्धता देखो, कुछ तो यह कह देते हैं कि इसी निराकारी फकीर ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ा है. हाँ ये फकीर एक मार्गदर्शक मंडल भी रखते हैं लेकिन उसका हाल बीड़ी के बंडल से भी गया गुजरा है. "अथातो घुम्मकड जिज्ञासा" "बिरयानी का शौक", "माँ का त्याग", "पत्नी का त्याग" क्या नहीं है इस निराले फकीर के पास.

पाँच साल पहले "चाय पर चर्चा" के बाद अब "चौकीदार चौकन्ना" नया अवतार है, वैसे भी ये देश में अवतार आम बात है. एक ख़ास बात भगवान राम के नाम पर सत्ता में आये थे, लेकिन फकीर तो राम के नाम पर चाय वाले से चौकीदार बन गया. हाफ पेंट से पन्द्रह लाख के सूट तक का सफर तय कर गया लेकिन भगवान राम टेंट में ही हैं.राम के भक्तों से ज्यादा इस वक्त इस फकीर के चेले बताये जाते है. सबका साथ सबका विकास ये इनका मूल वाक्य है, और इस पर साहिब खरे भी उतरे हैं. अम्बानी, अदानी, नीरव, सुशील मोदी, माल्या जैसों का साथ और विकास की कई कहानियाँ इनके इर्द गिर्द बुनी जाती है. इस पाँच साली चुनावी कुम्भ में ये फकीर क्या नये नये अवतार लेंगें ये देखना है, इनकी सेना भी है, जिसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना इनके भक्त कहते हैं.
वैसे इस देश में ये अकेले नहीं हैं इनके जैसे कई अवतार हैं जिनकी फेहरिस्त लम्बी है.