Monday, 29 July 2019

रेलवे बना रहा है प्लास्टिक की बोतल से टी शर्ट

             अब पानी की खाली बोतलों से कमायेगा रेलवे
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में एक है. लाखों लोग रोज भारतीय रेल में सफर करते हैं. रेल में यात्रा करने वाले यात्री करीब 16 लाख पानी की बोतल प्रतिदिन इस्तेमाल करते हैं इसमें से ज्यादातर प्रयोग के बाद इन्हें फेंक देते हैं. 
अब रेलवे ने इन बोतलों को क्रश कर टी शर्ट और कैप बनाने की सोची है. करीब एक लीटर की 12 बोतलों से एक टी शर्ट तैयार की जाएगी. इसके लिए 2250 स्टेशनों में क्रश मशीन लगवाई जाएंगी. इसका सफल प्रयोग रेलवे पटना जंक्शन पर कर चुका है.
रेलवे बोर्ड की ए डी जी स्मिता वस्त शर्मा ने बताया कि प्रत्येक स्टेशन पर 300 बोतल क्रश की जाएंगी. इस प्रकार 2250 स्टेशनों में 7 लाख बोतल क्रश कर 58 हजार टी शर्ट बनाई जा सकेंगी. 
इस प्रकार बनने वाली टी शर्ट आम टी शर्ट से ज्यादा मजबूत होंगी और इनकी बिक्री से रेलवे को आय बढ़ाने का एक तरीका भी मिल जाएगा.  
(आशुतोष पांडेय)

Sunday, 28 July 2019

क्या असल खबर मिलती है आपको

खबर किसी घटना की सूचना देना मात्र ही नहीं है खबर एक जिम्मेदारी है. आपको क्या लिखना है या दिखाना ये आपके विवेक पर निर्भर करता है. सनसनी को खबर नहीं, शरारत या फिर कमाई का तरीका कहिये. हर समय आपके समाज में या चारों ओर हजारों घटनाएं घटती हैं सबको लिख लेना या दिखाना ना तो संभव है और न ही ऐसा कोई प्रयास किया जाना चाहिए.

खबर ऐसी हो जिससे पाठक खुद को जोड़ सके समाज पर उसका नकारात्मक असर ना हो। आज खबर का मूल खोता जा रहा है. हमने खबर को एक सूचना या सनसनी मान लिया है.
रिपोर्टिंग आज दम तोड़ रही है, रिपोर्टिंग को कट कॉपी पेस्ट बना दिया गया है. प्रिंट मीडिया जिसने रिपोर्टिंग और खबरों का एक मानक तय किया गया था आज डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दम तोड़ चुका है.
आज खबर को मीडिया हाउस के लिए कमाई का जरिया बना दिया गया है। खबर के साथ एक्सक्लूसिव और ब्रेकिंग लगाकर उसे बेचा जाता है. लोकतंत्र का ये चौथा स्तम्भ अपनी शक्ति और उपादेयता खोता जा रहा है. एक नजर न्यूज़ चैनेल्स पर डालिये कहीं खबर की आत्मा नहीं दिखती है केवल सनसनी बेची जाती है.
नेशनल न्यूज़कॉज ने एक कोशिश की है लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को एक प्रतिष्ठता देने की। हम एक डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं, प्रेस जैसे किसी शब्द को खुद को जोड़ने की चेष्टा हम नहीं करते हैं क्योंकि हम जानते हैं यदि कंटेंट में दम होगा तो आपका प्यार मिलेगा.
इस हेतू आपके सुझाव और विचार हमें नए कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित करेगा.
(आशुतोष पांडेय)

Saturday, 27 July 2019

स्मार्टफोन कैसे ले सकता है आपकी जान

                        लाइफस्टाइल और आपका स्मार्टफोन
स्मार्टफोन आज हम सब की जरूरत है. आज स्मार्टफोन लाइफस्टाइल का एक हिस्सा बन चुका है. लेकिन यही लाइफस्टाइल आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है. हर दिन 5 घण्टे से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल आपको कई जानलेवा बीमारियां भी दे सकता है. मोटापा और दिल से सम्बंधित कई बीमारियां आपको घेर सकती हैं. 
 Google Photo 
कोलम्बिया की साइमन बोलिवर यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता मिरारी मैंटिला मैरोन के अनुसार लोगों को स्मार्टफोन के यूज के खतरों की जानकारियां भी होनी चाहिए. मैंटिला मैरोन के अनुसार शोध में ये बात साबित हो चुकी है कि दिन में 5 घण्टे से ज्यादा मोबाइल या स्मार्टफोन का प्रयोग करने से मोटापा बढ़ता है. एक शोध जो 19 से 20 साल की औसत उम्र के 1060 स्टूडेंट्स पर किया गया जिसमें 700 लड़कियां और 360 लड़कों को शामिल किया गया था. इस शोध से ये बात सामने आई कि 5 घण्टे से ज्यादा स्मार्टफोन के इस्तेमाल से मोटापे का खतरा 43 प्रतिशत बढ़ जाता है. 
Google Photo
इसी शोध में लाइफस्टाइल से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं. दिन भर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले सामान्य की तुलना दुगुना जंक फूड, शुगर और स्नैक्स का सेवन कर लेते हैं. इसके अलावा ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले फिजिकली भी कम एक्टिव होते हैं.
5 घण्टे से ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों में 26 प्रतिशत ओवरवेट श्रेणी में आये. फिजिकल एक्टिविटी रेट कम होने के कारण प्री मैच्योर डेथ, डाइबिटीज, दिल की बीमारी और कई प्रकार के कैंसर के शिकार आप हो सकते हैं.
(आशुतोष पांडेय)

गूगल पर 3.45 अरब का मुकदमा

                                          विश्व हलचल
"गूगल" यानि दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन इस पर 3 अरब रूपये का मुकदमा करने वाली तुलसी गैबार्ड कौन हैं? क्यों ये मुकदमा किया गया है.
तुलसी गैबार्ड अगले साल होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवार की दौड़ में शामिल हैं. अब उन्होंने गूगल पर 5 करोड़ डॉलर यानि 3.45 अरब का मुकदमा लॉस एंजिलिस कोर्ट में दायर किया है. 
कौन हैं तुलसी गब्बार्ड 
तुलसी अमेरिका की पहली हिन्दू सांसद भी हैं. उन्होंने गूगल पर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार में उनके साथ भेदभाव करने पर ये मुकदमा किया है. उनका आरोप है कि गूगल ने उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को बाधित किया है. जून में उनकी पहली डेमोक्रेटिक डिबेट के बाद उनके अभियान से जुड़े विज्ञापन को 6 घण्टे के लिए रोक दिया था. ऐसा दो बार किया गया है, एकाउंट सस्पेंड होने के कारण आम आदमी तक उनकी पहुंच और मिलने वाले चंदे पर भी काफी असर पड़ा है. गूगल ने तुलसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ये एक ऑटोमेटिक प्रोसेस है।
(आशुतोष पाण्डेय)

Friday, 26 July 2019

RTI संशोधन बिल: क्या वास्तव में इसे कमजोर करेगा

                      आरटीआई संशोधन बिल 2018
नई दिल्ली, आरटीआई राइट टू इनफार्मेशन 2005 ने देश की जनता को सरकार और उसके आनुषंगिक अंगों से जुड़ी सूचनाएं जानने का अधिकार दे दिया था. इसके बाद आरटीआई के जरिये कई कई बड़े खुलासे किए गए, कई आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या भी की गयी. ऐसा नहीं है कि हर बार इसका प्रयोग ठीक तरीके से ही किया गया हो कई बार तो व्यक्तिगत मामलों या फिर ब्लैकमेलिंग के लिए भी इसका प्रयोग किया गया। 

क्या मोदी सरकार ने आरटीआई को कमजोर किया?
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ये आरोप आम हो गए कि सरकार और सरकारी विभाग; सूचना सही तरीके से उपलब्ध नहीं करवा रहें हैं. कुछ मुद्दों पर विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली विश्वविद्यालय की डिग्री को लेकर दायर आरटीआई का जवाब दिल्ली विश्वविद्यालय ने नहीं दिया, जबकि अन्य कई ऐसे ही डिग्रियों के बारे में लगी आरटीआई के जवाब दिल्ली और अन्य विश्वविद्यालय द्वारा इस दौरान दिया गया है.
ताजा विवाद
अब ताजा विवाद आरटीआई में संशोधन बिल को लेकर है. सरकार अब इस बिल को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और फिर राज्यसभा में पास करवा चुकी है. असल में आम आदमी को ये मालूम नहीं है कि वर्तमान संशोधन क्या है? जब हमने इस बाबत कुछ लोगों से बात की तो उनका कहना था कि आरटीआई की आत्मा को मारने की कोशिश की कोशिश की जा रही है, लेकिन कैसे ये बता पाने में वे असमर्थ थे. असल में सोशल मीडिया में चल रहे संदेशो की वजह से ही ये सब हो रहा है. 
Courtesy : Google Photo 
क्या है ये संशोधन?
आइये अब बात करते हैं क्या है इस संशोधन में? इस विधेयक के अनुसार केन्द्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन और कार्यकाल को अब केंद्रीय सरकार द्वारा तय किया जाएगा. यहां विश्लेषकों और आरटीआई एक्टिविस्ट का ये मानना है कि सरकार जब चाहे किसी भी सूचना आयुक्त के कार्यकाल को खत्म कर सकती है. इस संशोधन के बाद आरटीआई में अन्य मनमाने संशोधन भी करवाये जा सकते हैं जिससे आरटीआई की आत्मा पर प्रहार होगा और ये कानून कुंद हो जाएगा. विपक्ष इसे राज्यसभा में लाने से पहले सलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की थी। लेकिन अब जब ये विधेयक कम संख्या बल होते हुए भी राज्यसभा में पास हो गया है तो ये तो जरूर कहा जा सकता है कि विपक्ष अपनी किसी भी रणनीति में सफल नहीं हो रहा है. ये संसदीय व्यवस्था को बड़ी चुनौती है.
(आशुतोष पाण्डेय)

Thursday, 25 July 2019

क्रिकेट: टीम इंडिया को मिला नया स्पॉन्सर ओप्पो की छुट्टी

नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने ऑनलाइन कोचिंग शिक्षा प्रदान करने वाली कंपनी BYJU को भारतीय टीम का मुख्य प्रायोजक बनाए जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. यह कंपनी अब भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर मोबाइल बनाने वाली कंपनी OPPO का स्थान लेगी. यह कंपनी 5 सितंबर 2019 से 31 मार्च 2022 तक भारतीय टीम की आधिकारिक प्रायोजक रहेगी.
इस प्रकार टीम इंडिया को एक नया स्पॉन्सर मिल गया है. BYJU अब सितंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली घरेलू सीरीज से भारतीय टीम की जर्सी पर दिखाई देगी. बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने BYJU को भारतीय टीम की आधिकारिक मुख्य प्रायोजक बनने की घोषणा करते हुए कहा, 'भारतीय टीम के साथ जुड़े रहने के लिए बीसीसीआई की तरफ से मैं OPPO को धन्यवाद देता हूं. भारतीय टीम का नया प्रायोजक बनने पर मैं BYJU को भी बधाई देता हूं. भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए बीसीसीआई और BYJU अब मिलकर काम करेंगे.'
बीसीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार इस डील में बीसीसीआई को उतनी ही रकम मिलेगी, जितनी OPPO कंपनी दे रही थी. इसमें उसे कोई घाटा नहीं होने वाला है. ये डील 31 मार्च 2022 तक चलेगी. BYJU की स्थापना केरल के एक उद्यमी बायजू रविंद्रन ने की है.
(आशुतोष पांडेय

Thursday, 4 July 2019

बिन सोशल मिडिया आपकी दुनिया सूनी

24 घंटे पहले एकाएक सभी सोशल प्लेटफॉर्म एक साथ सुस्त पड़ गये, इस दौरान यूजर्स का हाल देखने वाला था, फेसबुक और व्हाट्सएप्प तो और भी बुरा हाल था. ना ही फाइल भेजी जा रही थी ना ही डाउनलोड हो रही थी. ये समस्या भारतीय समयानुसार रात के करीब 8.30 बजे से शुरू हुई. लगभग 9 घंटे बाद ये समस्या खुद ठीक हो गई है. फेसबुक ने ट्वीट करके कहा है कि कुछ लोगों को वीडियो, पिक्चर फाइलें भेजने में परेशानी हुई. फेसबुक ने अपने यूजर्स को हुई परेशानी के लिए खेद जताते हुए कहा कि हम 100 प्रतिशत वापस आ गए हैं, आप लोगों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है. 1 अरब यूजर्स से ज्यादा फेसबुक पर फोटोज नहीं देख पा रहे हैं, डाउनलोड भी नहीं कर पा रहे हैं. ट्विटर पर कुछ यूजर्स ये भी आशंका जता रहे थे कि रूस या चीन ने अमेरिकी कंपनी फेसबुक पर साइबर अटैक करवाया है.

व्हाट्सएप्प  में कोई यूजर्स किसी को फोटो भेज नहीं पा रहे हैं और न ही स्टेटस में लगी फोटो ही देख पा रहे थे.
यही समस्या से इन्स्टाग्राम यूजर भी जूझ रहे थे.
फेसबुक, मैसेंजर, वॉट्सऐप और इंस्टा में पहली बार दिक्कत नहीं आई है, ऐसा कई बार होता है जब ये प्लेटफॉर्म धीमे पड़ जाते है लेकिन इस बार फोटोज में दिक्कत आ रही है. फोटोज की जगह फोटो नहीं दिख रही है, बल्कि उस फोटो की डीटेल्स दिख रही है. जैसे उस फोटो में कौन क्या कर रहा है? यहां तक कि उस फोटो में कोई शख्स हंस रहा है या बातें कर रहा है, इस तरह की भी डीटेल्स मिल रही हैं.
ये वास्तव में कोई सायबर अटैक था या नहीं इसके बारे में अभी कोई डिटेल नहीं मिली हैं लेकिन बिन सोशल मीडिया यूजर काफी परेशान रहे.