Sunday, 28 July 2019

क्या असल खबर मिलती है आपको

खबर किसी घटना की सूचना देना मात्र ही नहीं है खबर एक जिम्मेदारी है. आपको क्या लिखना है या दिखाना ये आपके विवेक पर निर्भर करता है. सनसनी को खबर नहीं, शरारत या फिर कमाई का तरीका कहिये. हर समय आपके समाज में या चारों ओर हजारों घटनाएं घटती हैं सबको लिख लेना या दिखाना ना तो संभव है और न ही ऐसा कोई प्रयास किया जाना चाहिए.

खबर ऐसी हो जिससे पाठक खुद को जोड़ सके समाज पर उसका नकारात्मक असर ना हो। आज खबर का मूल खोता जा रहा है. हमने खबर को एक सूचना या सनसनी मान लिया है.
रिपोर्टिंग आज दम तोड़ रही है, रिपोर्टिंग को कट कॉपी पेस्ट बना दिया गया है. प्रिंट मीडिया जिसने रिपोर्टिंग और खबरों का एक मानक तय किया गया था आज डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने दम तोड़ चुका है.
आज खबर को मीडिया हाउस के लिए कमाई का जरिया बना दिया गया है। खबर के साथ एक्सक्लूसिव और ब्रेकिंग लगाकर उसे बेचा जाता है. लोकतंत्र का ये चौथा स्तम्भ अपनी शक्ति और उपादेयता खोता जा रहा है. एक नजर न्यूज़ चैनेल्स पर डालिये कहीं खबर की आत्मा नहीं दिखती है केवल सनसनी बेची जाती है.
नेशनल न्यूज़कॉज ने एक कोशिश की है लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को एक प्रतिष्ठता देने की। हम एक डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं, प्रेस जैसे किसी शब्द को खुद को जोड़ने की चेष्टा हम नहीं करते हैं क्योंकि हम जानते हैं यदि कंटेंट में दम होगा तो आपका प्यार मिलेगा.
इस हेतू आपके सुझाव और विचार हमें नए कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित करेगा.
(आशुतोष पांडेय)

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