Friday, 26 July 2019

RTI संशोधन बिल: क्या वास्तव में इसे कमजोर करेगा

                      आरटीआई संशोधन बिल 2018
नई दिल्ली, आरटीआई राइट टू इनफार्मेशन 2005 ने देश की जनता को सरकार और उसके आनुषंगिक अंगों से जुड़ी सूचनाएं जानने का अधिकार दे दिया था. इसके बाद आरटीआई के जरिये कई कई बड़े खुलासे किए गए, कई आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या भी की गयी. ऐसा नहीं है कि हर बार इसका प्रयोग ठीक तरीके से ही किया गया हो कई बार तो व्यक्तिगत मामलों या फिर ब्लैकमेलिंग के लिए भी इसका प्रयोग किया गया। 

क्या मोदी सरकार ने आरटीआई को कमजोर किया?
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ये आरोप आम हो गए कि सरकार और सरकारी विभाग; सूचना सही तरीके से उपलब्ध नहीं करवा रहें हैं. कुछ मुद्दों पर विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली विश्वविद्यालय की डिग्री को लेकर दायर आरटीआई का जवाब दिल्ली विश्वविद्यालय ने नहीं दिया, जबकि अन्य कई ऐसे ही डिग्रियों के बारे में लगी आरटीआई के जवाब दिल्ली और अन्य विश्वविद्यालय द्वारा इस दौरान दिया गया है.
ताजा विवाद
अब ताजा विवाद आरटीआई में संशोधन बिल को लेकर है. सरकार अब इस बिल को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और फिर राज्यसभा में पास करवा चुकी है. असल में आम आदमी को ये मालूम नहीं है कि वर्तमान संशोधन क्या है? जब हमने इस बाबत कुछ लोगों से बात की तो उनका कहना था कि आरटीआई की आत्मा को मारने की कोशिश की कोशिश की जा रही है, लेकिन कैसे ये बता पाने में वे असमर्थ थे. असल में सोशल मीडिया में चल रहे संदेशो की वजह से ही ये सब हो रहा है. 
Courtesy : Google Photo 
क्या है ये संशोधन?
आइये अब बात करते हैं क्या है इस संशोधन में? इस विधेयक के अनुसार केन्द्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन और कार्यकाल को अब केंद्रीय सरकार द्वारा तय किया जाएगा. यहां विश्लेषकों और आरटीआई एक्टिविस्ट का ये मानना है कि सरकार जब चाहे किसी भी सूचना आयुक्त के कार्यकाल को खत्म कर सकती है. इस संशोधन के बाद आरटीआई में अन्य मनमाने संशोधन भी करवाये जा सकते हैं जिससे आरटीआई की आत्मा पर प्रहार होगा और ये कानून कुंद हो जाएगा. विपक्ष इसे राज्यसभा में लाने से पहले सलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की थी। लेकिन अब जब ये विधेयक कम संख्या बल होते हुए भी राज्यसभा में पास हो गया है तो ये तो जरूर कहा जा सकता है कि विपक्ष अपनी किसी भी रणनीति में सफल नहीं हो रहा है. ये संसदीय व्यवस्था को बड़ी चुनौती है.
(आशुतोष पाण्डेय)

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