Wednesday, 27 November 2019

महाराष्ट्र डर्टी पिक्चर



                               विश्लेषण
महाराष्ट्र में पिछले तीन दिनों में जो कुछ हुआ उससे भारतीय राजनीति के एक नए अध्याय का प्रारम्भ हुआ. बनती बिगड़ती सत्ता और उनके उलझते समीकरण इन सबने ये सोचने को मजबूर कर दिया कि क्या बास्तव में सत्ता वेश्या की तरह प्रयोग में लाई जाती है.

ऐसा नहीं कि सत्ता का चीरहरण इससे पहले ना हुआ हो लेकिन इस बार जो हुआ उसमें ड्रामा, रोमाँच, फैंटेसी सब मौजूद थी. लोकतंत्र में चुनाव और उसके बाद जीतने वाले जनप्रतिनिधियों का बेलगाम कुछ भी करना क्या लोकतंत्र की खूबी नहीं है. इस घटनाक्रम में कौन बड़ा या कौन छोटाएँ प्रश्न बचा ही नहीं सत्ता के खेल में हर कोई पाँसा फेकता नजर आया. 
साभार: Google Search 
संविधान, न्याय, शुचिता, विशेषधिकार सबकी सबने खूब धज्जियाँ उड़ाई. जिस तरीके से पल पल घटनाक्रम बदले उसने इतना साबित कर दिया कि एक नागरिक का वोट बटन दबाने तक महत्वपूर्ण होता है उसके बाद ये वोट बिकता है, नीलाम होता है. उच्च पदों और उच्व पदों पर आसीन लोग किस तरह लोकतंत्र का जनाजा निकाल सकते है इसका अंदाजा 90 घण्टे की सरकार अपने ही उपमुख्यमंत्री के ऊपर लगे तमाम केस वापस कर लेती है जबकि सरकार ने अपना बहुमत भी सिद्ध नहीं किया है से लगाया जा सकता है.


फड़नवीस, शरद पवार, अजित पवार, उद्धव ठाकरे इस सब के सूत्रधार रहे. चाणक्य शब्द खूब बदनाम हुआ. देश में संविधान और कायदों की खुली इज्जत उतारने वालो को चाणक्य कहा गया. एक चाणक्य जिसने अंधेरी रात में सत्ता खड़ी कर दी और दूसरे ने दिन के उजाले में उसी सत्ता को नँगा कर दिया. 

पता नहीं इन् लोगों को चाणक्य कहना चाणक्य के साथ कितना न्याय है इसे बताने के लिए खुद चाणक्य को भी इनके जितना गिरना होगा. लेकिंन अब ये परिपाटी बन जाएगी जो जितना बड़ा जुआरी उतना बड़ा चाणक्य. 
पर ये भी सच है, कि काठ हांडी बार-बार चूल्हे पर चढ़ नहीं सकती है.

(आशुतोष पाण्डेय)

Friday, 22 November 2019

अब विशाल डडलानी छोड़ेंगे इंडियन आइडल

बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़
विशाल डडलानी बॉलीवुड कंपोजर और सिंगर अपनी बेबाक राजनैतिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं. अक्सर अपने ट्वीट्स को लेकर ट्रोलर्स के निशाने पर भी आ जाते हैं. हालिया मामले में पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट को लेकर किये गए उनके ट्वीट के लिए उनकी काफी आलोचना की जा रही है और वे फिर से ट्रोलर्स के निशाने पर हैं. #SackDadlaniFromIndianIdol हैशटैग ट्विटर पर काफी शेयर किया जा रहा है.
आजकल किसी का भी ट्रोल हो जाना आम बात है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई हाल ही में रिटायर हुए हैं. राम मंदिर मामले पर दिया गया उनका फैसला ऐतिहासिक रहा. ट्वीटर पर विशाल को इंडियन आइडल से हटाने की मुहिम चलाई जा रही है. 
लेकिन सोनी एंटरटेनमेंट की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है ना ही विशाल ने इंडियन आइडल को छोड़ने को लेकर कोई अपडेट किया है. अनु मलिक पहले ही #MeToo के कारण इंडियन आइडल छोड़ चुके हैं. उन पर आरोप लगाने वाली सोना महापात्रा ने दो दिन पहले विशाल को कोसा था कि इस मुद्दे पर उन्होंने अनुमलिक की आलोचना क्यों नहीं की?

अनुमलिक की इंडियनआइडल से छुट्टी 









इस बारे में हम आपके विचार आमंत्रित करते हैं कि क्या किसी व्यक्ति विशेष के लिए कोई व्यंगात्मक ट्वीट अपराध है देश में कई बड़े नेता समय समय पर आपत्तिजनक ट्वीट करते आयें हैं, लेकिन उनकी आईटी टीम ट्रोलर को ब्लाक कर देती है लेकिन एक सेलिब्रेटी के पास ऐसी टीम नहीं होती है, यहाँ आप बताएं क्या इस प्रकार के ट्वीट और ट्रोल ठीक हैं?

Thursday, 21 November 2019

शिवसेना की किसान कर्जमाफी घोषणा: मजबूरी या इच्छा



जैसे ही शिवसेना के नेतृत्व में महाराष्ट्र में सरकार बनना तय हुआ वैसे ही घोषणाएं भी शुरू हो गयी हैं. महाराष्ट्र में महाविकास गठबंधन की सरकार बनेगी जिसमें उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री होंगे. एनसीपी और कांग्रेस के सहयोग से बेमेल गठबंधन की सरकार को बनते एक महीने का समय लग गया. शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के साथ कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत सरकार चलाएंगे. हमारे सूत्रों के मुताबिक़ महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों की कर्जमाफी की घोषणा हो सकती है. 
कांग्रेस और एनसीपी के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का यह पहला मुद्दा भी है. शिवसेना सूत्रों के मुताबिक अभी तक के आकलन के अनुसार तकरीबन 35 हजार करोड़ रुपये के किसानों के कर्जमाफ किए जाएंगे. अगर इससे भी ज्यादा रकम किसानों की कर्जा माफी के लिए खर्च करनी पड़े तो सरकार उसके लिए पूरी तरह से तैयार है. सरकार का सबसे ज्यादा फोकस गाँव, गरीबी और किसान पर रहेगा.
सूत्रों के मुताबिक न्यूनतम साझा कार्यक्रम लगभग तैयार है. तीनों ही दल एक दूसरे के वैचारिक धरातल का सम्मान करते हुए आगे बढ़ेंगे. न तो कट्टर हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाएगा और न ही मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए बाकायदा 12 सदस्यीय को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाएगा. इस को-ऑर्डिनेशन कमेटी के ऊपर सुपर कमेटी होगी. इस कमेटी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी के प्रमुख शरद पवार होंगे.

अनु मलिक इंडियन आइडल से बाहर #METOO



सिंगर और कंपोजर अनु मलिक पर कई महिलाओं ने #MeToo मूवमेंट के तहत यौन शोषण के आरोप लगाए थे. जिसके बाद अब अनु मलिक सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल 11वें एडिशन से बाहर हो गए हैं. अनु मलिक ने बीते दिनों सोशल मीड‍िया पर बुरी तरह ट्रोल होने के बाद एक ओपन लेटर भी लिखा था. लेकिन इसके बाद भी विवाद नहीं थमने के कारण अनु मलिक ने शो से बाहर जाने का फैसला किया है. उनके जगह किसे जज बनाया जाएगा इसका अभी कोई पता नहीं है. अनु मलिक पर लगे आरोपों के बाद सोनी टीवी को राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस भेजा था. आयोग ने नोटिस को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी साझा किया था.
अनु मलिक ने कुछ दिनों पहले अपने ऊपर लगे मीटू आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी. उन्होंने #MeToo आरोपों को खारिज करते हुए एक ओपन लेटर ट्व‍िटर हैंडल पर शेयर किया. अनु मलिक ने इस ट्वीट के जरिये लिखा, 'पिछले एक साल से मुझपर कुछ ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं जो मैंने किया ही नहीं है. मैं इतने दिन चुप रहा, इंतजार कर रहा था कि सच अपने आप सामने आ जाएगा. लेकिन अब मुझे एहसास हुआ कि मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी समझा जा रहा है. जबसे मुझपर यह गलत आरोप लगाए गए हैं तब से मेरी प्रतिष्ठा, मेरे और मेरे परिवार के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा है. इन आरोपों ने मुझे और मेरे करियर को बर्बाद कर दिया है. मैं खुद को हेल्पलेस, नजरअंदाज और घुटा हुआ महसूस कर रहा हूं.'

उन्होंने कहा, 'यह बहुत शर्मनाक है कि जिंदगी के इस पड़ाव में मेरे नाम के साथ इतने गंदे शब्द और डरावनी घटनाओं को जोड़ा जा रहा है. इस बारे में पहले क्यों नहीं सवाल किए गए? ये आरोप तभी क्यों लगाए गए जब मैं टीवी पर वापस आया जो कि इस वक्त मेरे आय का एकमात्र जरिया है. दो बेटियों का बाप होने के नाते मैं इस तरह के काम करने की सोच भी नहीं सकता. शो जारी रहना चाहिए. लेकिन इस हंसते चेहरे के पीछे...मैं तकलीफ में हूं. मैं किसी अंधेरे में हूं. मुझे बस न्याय चाहिए.'
इंडियन आइडल 11 के जज पैनल में शामिल होने के बाद अनु मलिक पर यौन शोषण के आरोप लगने लगे. इसके बाद सिंगर सोना मोहापात्रा और नेहा भसीन ने इंडियन आयडल में अनु के जज बनने पर आपत्त‍ि भी जताई थी. हालांकि, इन सबके बीच कई लोग अनु के सपोर्ट में भी आए. इनमें सिंगर हेमा सरदेसाई ओर कश्मीरा शाह भी हैं, जिन्होंने अनु पर लगे आरोपों को झूठा बताया. फिलहाल, अनु इंडियन आइडल सीजन 11 में बतौर जज नजर आ रहे थे. अब देखना है आगे क्या होता है, वैसे बालीवुड में #MeToo के आरोप लगते ही रहते हैं. इन आरोपों की सच्चाई को साबित करने के लिए सबूत भले ही ना हों लेकिन सेलिब्रेटी की जिन्दगी में भूचाल जरूर आ जाता है. 

जेएनयू बीएचयू के बहाने राष्ट्रवाद



इस समय देश के अन्दर अघोषित वैचारिक विद्रोह चल रहा है इस विद्रोह के क्या मायने हैं या इसकी उपादेयता क्या होगी, कोई नहीं जानता है. धर्म जाति के आधार पर तो देश में कई बार विरोध दिखें हैं लेकिन वो कभी देश के संवैधानिक ढांचें पर हावी नहीं हुए. वैसे बाहरी तौर पर देखा जाय तो आजादी के बाद से राष्ट्रवाद का सबसे ज्यादा हल्ला इन 5 सालों में हुआ है इससे देश का कितना फायदा हुआ कहा नहीं जा सकता है. लेकिन राष्ट्रवाद की आड़ में घृणा जरूर व्यापक रूप में पनपी है.
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एक मुस्लिम के संस्कृत पढाने को लेकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन क्या है? विश्वगुरू की कल्पना में जीने वाला देश आज धार्मिक कट्टरता के साथ जी रहा है. प्रो० फिरोज खान संस्कृत के श्लोक नहीं पढ़ा सकते हैं क्या ये ही हिन्दू धर्म का सत्व है. अगर आप कह दो ये गलत तो आप से कहा जाता है दूसरे धर्म की बुराई या कट्टरता को देखो... क्या भारतीय त्तात्विक और वैदिक दर्शन इसकी पुष्टि करता है?

अब यहाँ सवाल ये है कि क्या मैं दूसरे धर्म का उपासक हूँ... नहीं ना, तो दूसरा जो करे करता रहे, मेरा धर्म सर्वोच्च है और रहेगा. ये बात हर धर्म के मानने वाले को समझनी होगी. कट्टरता के साथ जीने वाले देश आपके पड़ोस में हैं उनका हाल देख लो. लेकिन कोई समझने को तैयार नहीं है. जो समझे उसे देशद्रोही कह दो, कितना आसान है.


छात्र आन्दोलन वो भी देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का दमन सिर्फ इसलिए किया जा रहा है कि वहां पढने वाला युवा आज सरकार से सवाल पूछ रहा है वह हिम्मत करता है अपने हक मांगने का, नहीं तो फीस वृद्धि को लेकर देश में कई जगह युवा आन्दोलनरत हैं, उनकी आलोचना नहीं होती है. जयप्रकाश नारायण का नवनिर्माण आन्दोलन ऐसे ही युवा छात्रों का आन्दोलन था तब किसी ने उन छात्रों को अराजक या देशद्रोही नहीं कहा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी भी उससे जुड़े रहे. आन्दोलनों पर लाठी चलती है, लेकिन आन्दोलनकारियों को कभी देशद्रोही करार नहीं दिया गया. ये कैसी सत्ता है जो मूकदर्शक हो ये सब की साक्षी है. क्यों शासक इतने भयभीत हैं कि छात्रों के एक आन्दोलन से उनको सत्ता छिनती दिख रही है.


यहाँ बड़ी बात ये है कि देश का अवाम चुप है जैसे उसे कुछ फर्क ही ना पड़ता हो, सवाल करने वालों को ट्रोल कर, उनको गाली दे, उनकी हत्या कर उसको अपना राष्ट्रीय कर्तव्य पूरा हुआ दिखता है. शायद आज आप इन बातों को ना पचा पायें लेकिन आने वाले एक या दो दशक में ही आप खुद को धिक्कारेंगे कि उस समय इन गलत बातों के साथ आप क्यों खड़े थे? आज जो लाठी किसी और कि संतानों पर पड़ रही है कल किसी सवाल के जवाब में आपके बच्चे को भी पड़ेगी. जान लीजिये उस वक्त तक ये लाठी और मजबूत होगी.

आज  पुलिस जिस तरीके से एक दिव्यांग को जूतों से रौंद रही है और आप तालियाँ बजा रहें हैं कल जब इस स्थान पर आपका बच्चा होगा तो क्या करेंगे? सत्ता का मद इतना बुरा होता है कि हर सिर चाहे बाप का ही क्यों ना हो काट दिया जाता है. इतिहास पढ़ लीजिये जनाब, अगला सिर आपका हो तो कोई आश्चर्य मत कीजियेगा.

(आशुतोष पाण्डेय)
नेशनल न्यूजकॉज 

Tuesday, 19 November 2019

ब्रेकिंग: सोनिया गांधी को 10 साल पुरानी टाटा सफारी

एसपीजी सुरक्षा वापस लेने के बाद अब सोनिया गांधी को दी गयी 10 साल पुरानी टाटा सफारी और पुलिस सुरक्षा को लेकर विवाद छिड़ गया है. मंगलवार को संसद में कांग्रेस ने इस मामले को उठाया और पीएम मोदी से सुरक्षा व्‍यवस्‍था में किए गए बदलाव पर जवाब मांगा. यहाँ आपको बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही गांधी परिवार से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को हटा दिया गया था और उन्हें जेड-प्लस सिक्योरिटी दी गई थी. जेड-प्लस सिक्योरिटी के तहत 100 सुरक्षाकर्मी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं. 
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1991 में श्रीलंकाई आतंकवादी समूह ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी. इसके बाद से ही गांधी परिवार को कड़ी सुरक्षा दी जा रही थी. लेकिन वर्तमान सरकार का मानना है कि अब गांधी परिवार को अब किसी विशेष सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है. इसलिए उनकी सुरक्षा कम कर दी गयी है. अब सोनिया गांधी को कोई बुलेट प्रूफ गाड़ी नहीं दी गयी है इसके बजाय 10 साल पुरानी टाटा सफारी दी गयी है. इससे पहले एसपीजी प्रोटेक्शन के दौरान गांधी परिवार की सुरक्षा का जिम्मा वो कमांडो संभालते थे जो सबसे मजबूत और स्मार्ट होते हैं और उन्हें इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग भी दी जाती है. साथ ही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी रेंज रोवर गाड़ि‍यों का उपयोग करती थीं जो किसी किस्‍म के धमाकों से बचने में भी सक्षम होती थीं जबकि राहुल गांधी फॉर्च्यूनर कार का उपयोग करते थे.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा को भी कुछ समय पहले ही कम किया गया है. जिसके बाद उन्हें एसपीजी की तरफ से बख्तरबंद बीएमडब्ल्यू कर दी गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सीआरपीएफ ने एसपीजी से गांधी परिवार को भी बख्तरबंद गाड़ियां देने का अनुरोध किया है लेकिन अब तक एसपीजी ने इसपर कोई जवाब नहीं दिया है.
सरकार के इस कदम से नाराज कांग्रेस के नेताओं ने इस मामले को लेकर आज संसद में हंगामा किया. इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों ने भी कांग्रेस का साथ दिया. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी सामान्य प्रोटेक्टी नहीं हैं. वाजपेयी जी ने भी गांधी परिवार को एसपीजी की प्रोटेक्शन दी थी. 1999 से लेकर 2019 तक कांग्रेस की सरकार 2 बार बनी लेकिन कभी भी गांधी परिवार से एसपीजी कवर की सुरक्षा नहीं हटाई गई. 

Monday, 18 November 2019

वोडाफोन आईडिया का ग्राहकों को तमाचा: महंगी हुई कॉल


                              जिओ के बाद वोडाफोन आईडिया की लूट 
जिओ मोबाइल आने के बाद टेलीकॉम कम्पनियों में टैरिफ को लेकर गला काट प्रतियोगिता शुरू हुयी थी लेकिन 2 साल में ही सब बदलने लगा है पहले जिओ ने दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने के लिए पैसा लेना शुरू किया उसके बाद 1 दिसम्बर से Vodafone Idea भी कॉल दर बढाने वाले हैं. इससे करीब 30 करोड़ यूजर की जेब कटेगी.
वोडाफोन-आइडिया ने टेलीकॉम सेक्टर पर बढ़ते वित्तीय दबाव को इसकी प्रमुख वजह बताया है. वित्तीय संकट के मद्देनजर दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने एक दिसंबर से मोबाइल सेवा की दरें बढ़ाने का फैसला किया है. कम्पनी ने आज यह ऐलान किया है.
वोडाफोन आइडिया ने आज एक बयान में कहा , "अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय डिजिटल अनुभव सुनिश्चित करने के लिए कंपनी एक दिसंबर 2019 से अपने टैरिफ के दाम बढ़ाएगी." अभी कंपनी ने टैरिफ में प्रस्तावित वृद्धि की कोई जानकारी नहीं दी है.
वोडाफोन आइडिया को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में लगभग 50,922 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है. किसी भी भारतीय कंपनी का एक तिमाही में यह अब तक का यह सबसे बड़ा नुकसान है. समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर बकाये के भुगतान के लिये जरूरी प्रावधान किये जाने की वजह से उसे यह नुकसान हुआ है. इस नुकसान को पूरा करने के लिए कम्पनी ग्राहकों की जेब में डाका डालने की तैयारी कर रही है. अभी वोडाफोन आइडिया के पास मोबाइल के लगभग 30% ग्राहक हैं.
(Business Desk)
National News Cause 
देश की आवाज को बेबाकी से उठाना आज आसान नहीं है, इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में आपका सहयोग हमें अच्छे संसाधन और तकनीक के जरिये मुद्दों की तह तक पहुचने में मदद करेगा. आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर हमारी आर्थिक मदद कर सकते हैं.
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Monday, 4 November 2019

WhatsApp अब फ़िंगरप्रिंट से लॉक अनलॉक करें


अगर आप व्हाट्सएप्प का प्रयोग करते हैं तो आपके लिए एक नया सुरक्षा फीचर जारी किया है. अब आप अपने स्मार्टफोन के जरिये व्हाट्सएप्प को फिंगरप्रिंट से लॉक अनलॉक कर पाएंगे.
WhatsApp Fingerprint Lock Feature 
फेसबुक के इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने अपने एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए फिंगरप्रिंट लॉक फीचर को लॉन्च किया है. आईफोन यूज़र्सस के लिए टच आईडी ( फिंगरप्रिंट रिकग्निशन) और फेस आईडी ( फेशियल रिकग्निशन) फीचर फरवरी 2019 से ही उपलब्ध हैं. इसका मतलब अब एंड्राइड मोबाइल यूजर भी WhatsApp के इस नए सुरक्षा फीचर की मदद से ऐप को अनलॉक कर पाएंगे.
WhatsApp Fingerprint Lock for Android
आईफोन यूज़र्स के लिए जैसे टच आईडी फीचर ऐनेबल है उसी तरह अब व्हाट्सऐप एंड्रॉयड यूज़र भी ऐप को अपने फिंगरप्रिंट से लॉक या अनलॉक कर पाएंगे. यूज़र इस बात का भी चुनाव कर सकते हैं कि ऐप बंद होने के कितनी देर बाद खुद-ब-खुद लॉक हो जाए, यहां आपको तीन विकल्प मिलेंगे, पहला है तुरंत, दूसरा है एक मिनट बाद और तीसरा विकल्प है, 30 मिनट बाद. इसके अलावा अब यूज़र इस बात का भी चुनाव कर सकते हैं कि सेंडर का मैसेज नोटिफिकेशन में दिखाई दे या फिर नहीं. 
How can enable Finger Print Lock
WhatsApp Fingerprint Lock को ऐनेबल करने के लिए एंड्रॉयड यूज़र को सेटिंग्स > अकाउंट > प्राइवेसी > फिंगरप्रिंट लॉक में जाना होगा। फिंगरप्रिंट ऑप्शन को ऐनेबल करने के बाद यूज़र को अपना फिंगरप्रिंट कंफर्म करना होगा. दुनियाभर में एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए यह फीचर जल्द रोल आउट किया जा सकता है.

आईफोन यूज़र के पास एक अतिरिक्त फीचर भी है, यूज़र चाहें तो बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए फेस आईडी फीचर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि आईफोन यूज़र्स के लिए इस साल फरवरी में टच आईडी और फेस आईडी विकल्प को ऐनेबल कर दिया गया है.