Monday, 18 November 2019

महाराष्ट्र में सत्ता का खेल: किसकी शह किसकी मात



लगभग एक माह पहले आये महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजों के बाद भी वहां सरकार का गठन नहीं हो पाया. 288 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी लेकिन बहुमत से कोसों दूर रह गयी. लेकिन उसको विश्वास था कि शिवसेना और भाजपा गठबंधन 30 सालों की तरह इस बार भी चल निकलेगा लेकिन शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग कर भाजपा का सरकार बनाने का सपना तोड़ दिया. शिवसेना भी सरकार नहीं बना पायी तो राज्यपाल ने विधानसभा को निलम्बित कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया. इसके बाद भी शह-मात का खेल जारी रहा. भाजपा और शिवसेना के बाद एसी पी और कांग्रेस का नम्बर आता है लेकिन ना ही भाजपा या शिव सेना से इन दलों का कोई वैचारिक समन्वय बन सकता है. राज्य में तमाम समीकरणों पर विचार किया गया लेकिन हर समीकरण में वैचारिक मनभेद सामने आया. शिवसेना अब कांग्रेस और एनसीपी को लेकर सरकार बनाने का ख़्वाब पाले है, जिसके चलते शिवसेना के कोटे के एक मंत्री ने केन्द्रीय मंत्री मंडल से त्याग पत्र दे विपक्ष का दामन थाम लिया.
उद्धव ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस के बीच एक बड़ी खींचतान यहाँ अभी भी चल रही है. कांग्रेस और एनसीपी जहां शिवसेना की कट्टरता को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहते हैं, वहीं दूसरी और ठाकरे परिवार किसी भी प्रकार महाराष्ट्र की कुर्सी को हथियाने की पुरजोर कोशिश में है.
अब बात लाभ-हानि की, तो शुरू करते हैं कांग्रेस से जिसकी व्यापकता एनसीपी और शिवसेना से ज्यादा है. महाराष्ट्र के चुनाव में पार्टी को मिली 44 सीट उसकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा हैं. मृतप्राय कांग्रेस के लिए ये मौक़ा है जब उसके पास लम्बे समय के बाद किंग मेकर की भूमिका है. एनसीपी और कांग्रेस में चुनाव पूर्व गठबंधन था लेकिन दोनों के मिला के कुल 98 सीटें ही हैं जबकि 288 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 145 का जादुई आकड़ा चाहिए और ये बिना शिवसेना के नहीं मिल सकता है, लेकिन शिवसेना को मुख्यमंत्री का पद चाहिए. बिना मुख्यमंत्री तो उसके लिए उपलब्ध सबसे उचित विकल्प भाजपा ही है.

यहाँ उद्धव ठाकरे और फड़नवीस की लड़ाई में महाराष्ट्र की जनता को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. भाजपा को यहाँ अपने ही मात दे गये मोदी और शाह की जोड़ी भी यहाँ कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई. कई विश्लेषक इसे भाजपा कि उल्टी गिनती कह रहें हैं. वहीं ज्यादातर लोगों का मानना है कि मोदी सरकार की कई गलत नीतियों ने उन्हें जनता से दूर किया है. आज जनता किसी बहकावे में नहीं आने वाली है, उसको अपनी मूलभूत समस्याओं का समाधान भी चाहिए.
इस सब के बाद ये तो साफ़ हो गया है ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है यदि उसका स्वार्थ पूरा हो. यहाँ कांग्रेस के लिए ये एक सकारात्मक मूव है कि बिना किसी बड़े नेता या मुद्दे के लोग कांग्रेस की और लौटे हैं. इसका साफ़ मतलब ये है जनता कभी भी भाजपा या मोदी के विकल्प के रूप में किसी को भी खड़ा कर सकती है. यहाँ जनता और उसके वोट की कीमत बढी है.
(आशुतोष पाण्डेय )   


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वोडाफोन आईडिया का ग्राहकों को तमाचा: महंगी हुई कॉल


                              जिओ के बाद वोडाफोन आईडिया की लूट 
जिओ मोबाइल आने के बाद टेलीकॉम कम्पनियों में टैरिफ को लेकर गला काट प्रतियोगिता शुरू हुयी थी लेकिन 2 साल में ही सब बदलने लगा है पहले जिओ ने दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने के लिए पैसा लेना शुरू किया उसके बाद 1 दिसम्बर से Vodafone Idea भी कॉल दर बढाने वाले हैं. इससे करीब 30 करोड़ यूजर की जेब कटेगी.
वोडाफोन-आइडिया ने टेलीकॉम सेक्टर पर बढ़ते वित्तीय दबाव को इसकी प्रमुख वजह बताया है. वित्तीय संकट के मद्देनजर दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने एक दिसंबर से मोबाइल सेवा की दरें बढ़ाने का फैसला किया है. कम्पनी ने आज यह ऐलान किया है.
वोडाफोन आइडिया ने आज एक बयान में कहा , "अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय डिजिटल अनुभव सुनिश्चित करने के लिए कंपनी एक दिसंबर 2019 से अपने टैरिफ के दाम बढ़ाएगी." अभी कंपनी ने टैरिफ में प्रस्तावित वृद्धि की कोई जानकारी नहीं दी है.
वोडाफोन आइडिया को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में लगभग 50,922 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है. किसी भी भारतीय कंपनी का एक तिमाही में यह अब तक का यह सबसे बड़ा नुकसान है. समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर बकाये के भुगतान के लिये जरूरी प्रावधान किये जाने की वजह से उसे यह नुकसान हुआ है. इस नुकसान को पूरा करने के लिए कम्पनी ग्राहकों की जेब में डाका डालने की तैयारी कर रही है. अभी वोडाफोन आइडिया के पास मोबाइल के लगभग 30% ग्राहक हैं.
(Business Desk)
National News Cause 
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Sunday, 17 November 2019

मोदी को क्यों याद आ गयी बेरोजगारी



पांच साल पूरे करने के बाद पुन: सत्ता में आने वाले नरेंद्र मोदी एक ऐसे प्रधानमंत्री मंत्री हैं जिन्होंने कभी जमीनी मुद्दों पर कोई बात नहीं की, इस बात के लिए उनकी आलोचना हर स्तर पर होती रहती है. लेकिन पाकिस्तान, कश्मीर, तीन तलाक और अब राम मन्दिर को लेकर सारा श्रेय मोदी खुद लूट ले जाते हैं. देश की गिरती अर्थव्यवस्था, जाती नौकरियां, हंगर इंडेक्स में शर्मनाक स्तर काफी बड़े मुद्दे होने चाहिए लेकिन ऐसा कहीं नहीं दिखता है. धारा 370, पाकिस्तान, नेहरू, तीन तलाक और राम मन्दिर में सारा देश व्यस्त है. भूख पर बात करना आज एक अपराध है. ठीक भी है जब इन सब के बावजूद वोट भर कर मिले तो और कुछ क्यों करना. मिडिया का हाल आज ये है कि उसके पास आम जनता के लिए ना तो प्राइम टाइम होता है ना कोई डिबेट.
जहां आम आदमी की बात होती है उसे बैन करने की बात होती हैऔर इसके लिए आम आदमी भी अपनी सहमति दे रहा है. अब जल्द ही संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होना है, इस सत्र में पक्ष के पास कश्मीर और राम मन्दिर जैसी उपलब्धियां हैं जिनके जरिये उनको विपक्ष को गरियाने का मौक़ा मिलना तय है. कल यानि 18 नवम्बर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र को लेकर आज एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है. इस दौरान पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक पार्टियों से यह भी कहा कि संसद में बेरोजगारी पर भी चर्चा होनी चाहिए. अब मोदी की बेरोजगारी को लेकर ये चिंता कितनी गम्भीर है ये तो सत्र शुरू होने के बाद ही पता चलेगा, बड़ी बात ये है कि नरेंद्र मोदी ने पहली बार ये मान लिया कि देश बेरोजगारी की गम्भीर समस्या से गुजर रहा है.
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने मांग की कि सत्र के दौरान आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और कृषि संकट के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि संसद का सबसे महत्वपूर्ण काम चर्चा और बहस करना है.

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Monday, 4 November 2019

WhatsApp अब फ़िंगरप्रिंट से लॉक अनलॉक करें


अगर आप व्हाट्सएप्प का प्रयोग करते हैं तो आपके लिए एक नया सुरक्षा फीचर जारी किया है. अब आप अपने स्मार्टफोन के जरिये व्हाट्सएप्प को फिंगरप्रिंट से लॉक अनलॉक कर पाएंगे.
WhatsApp Fingerprint Lock Feature 
फेसबुक के इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने अपने एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए फिंगरप्रिंट लॉक फीचर को लॉन्च किया है. आईफोन यूज़र्सस के लिए टच आईडी ( फिंगरप्रिंट रिकग्निशन) और फेस आईडी ( फेशियल रिकग्निशन) फीचर फरवरी 2019 से ही उपलब्ध हैं. इसका मतलब अब एंड्राइड मोबाइल यूजर भी WhatsApp के इस नए सुरक्षा फीचर की मदद से ऐप को अनलॉक कर पाएंगे.
WhatsApp Fingerprint Lock for Android
आईफोन यूज़र्स के लिए जैसे टच आईडी फीचर ऐनेबल है उसी तरह अब व्हाट्सऐप एंड्रॉयड यूज़र भी ऐप को अपने फिंगरप्रिंट से लॉक या अनलॉक कर पाएंगे. यूज़र इस बात का भी चुनाव कर सकते हैं कि ऐप बंद होने के कितनी देर बाद खुद-ब-खुद लॉक हो जाए, यहां आपको तीन विकल्प मिलेंगे, पहला है तुरंत, दूसरा है एक मिनट बाद और तीसरा विकल्प है, 30 मिनट बाद. इसके अलावा अब यूज़र इस बात का भी चुनाव कर सकते हैं कि सेंडर का मैसेज नोटिफिकेशन में दिखाई दे या फिर नहीं. 
How can enable Finger Print Lock
WhatsApp Fingerprint Lock को ऐनेबल करने के लिए एंड्रॉयड यूज़र को सेटिंग्स > अकाउंट > प्राइवेसी > फिंगरप्रिंट लॉक में जाना होगा। फिंगरप्रिंट ऑप्शन को ऐनेबल करने के बाद यूज़र को अपना फिंगरप्रिंट कंफर्म करना होगा. दुनियाभर में एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए यह फीचर जल्द रोल आउट किया जा सकता है.

आईफोन यूज़र के पास एक अतिरिक्त फीचर भी है, यूज़र चाहें तो बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए फेस आईडी फीचर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि आईफोन यूज़र्स के लिए इस साल फरवरी में टच आईडी और फेस आईडी विकल्प को ऐनेबल कर दिया गया है.